‘माघ मेले में दातून नहीं बिक रही…झूठे वीडियो बन रहे’:दूर-दूर से बेचने आए लोग बोले- कोई फ्री भी नहीं ले रहा; जानिए हकीकत

प्रयागराज के माघ मेले में दातून के बिजनेस को लेकर चर्चा है। कई ऐसे वीडियो सामने आए, जिनमें लोग दावा कर रहे कि दातून बेचकर हर दिन 1 हजार से ज्यादा रुपए कमा रहे हैं। कई तो पूरे मेले में लाखों रुपए कमाने का दावा कर रहे हैं। इन वीडियो को देखकर तमाम लोग माघ मेले में दातून बेचने चले आए। यहां कुछ दिन रहे, लेकिन बाद में अपने घर लौट गए। दैनिक भास्कर की टीम ने दातून बेचने वाले दुकानदारों से बात की। यह समझने की कोशिश की कि क्या वास्तव में दातून बेचकर हर दिन 1 से 2 हजार रुपए कमा रहे? दातून कितने की बेच रहे? बेचने का तरीका क्या होता है? वीडियो देखकर दातून बेचने चले आए
प्रयागराज में 3 जनवरी से माघ मेले की शुरुआत हुई। शुरुआत के एक हफ्ते तक सर्दी के चलते कम लोग पहुंचे। लेकिन, पिछले 5 दिनों से हर दिन बड़ी संख्या में लोग स्नान के लिए पहुंच रहे। मेले में करीब 3 हजार छोटी-बड़ी दुकानें लगी हैं। घाट के आसपास माला-फूल, प्रसाद, पानी का केन बेचने वाले लोग अब अपनी दुकानों पर दातून भी रखने लगे हैं। पहले ऐसा नहीं था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर लोग दातून रखने लगे। हमें यहीं संजू देवी मिलीं। संजू संगम से करीब 62 किलोमीटर दूर गोपीगंज की रहने वाली हैं। संगम के पास जल भरने वाला डिब्बा और प्रसाद बेचती हैं। इस बार दातून भी बेच रही हैं। हमने पूछा कि दातून की बिक्री कैसी है? संजू कहती हैं, कोई दातून नहीं बिक रही। यहीं पड़े-पड़े सब सूख रही हैं। किसी दिन 1-2 बिक भी जाती हैं, लेकिन इससे क्या होगा? कुछ लोग तो कहते हैं कि 5 रुपए की 10 दो, हम तो कहते हैं कि तुम ऐसे ही ले जाओ। संजू कहती हैं- हम मोबाइल नहीं चलाते, लेकिन सुना है कि मोबाइल में वीडियो वायरल है। उसके बाद से लोग यहां दातून बेचने आ रहे हैं। संजू के ही साथ 15 साल की सरिता भी मेले में दुकान लगाने पहली बार आई हैं। वह भी अपने साथ दातून लेकर आई हैं। सरिता कहती हैं- 10 दिन हो गए, एक भी नहीं बिकी। मोबाइल में देखे थे कि लोग बहुत कमा रहे हैं। लेकिन, हकीकत में ऐसा नहीं है। 10 दिन में 100 रुपए की दातून भी नहीं बेच पाए
हमारी मुलाकात संगम एरिया में मिर्जापुर से आए राजेंद्र से हुई। राजेंद्र ने दुकान के सामने दातून का एक गट्ठर खड़ा किया था और खुद सो रहे थे। हमने जगाया, फिर वह अपनी कहानी बताने लगे। कहते हैं- दातून को कोई पूछ ही नहीं रहा। 3 जनवरी से हम मेले में दुकान लगा रहे, अब तक 100 रुपए की भी नहीं बेच पाए। जनता ऐसे ही सामने से निकल जाती है, खरीदती ही नहीं। हो सकता है कि लोग ब्रश-मंजन घर से लेकर आ रहे हों। राजेंद्र के पास दुकान चलाने वाली संगीता कहती हैं- सब झूठ का वीडियो बनाकर लोगों को गुमराह कर रहे। ये जो वीडियो बना रहे, सब बाहरी हैं। वह वीडियो ही बनाने आए हैं। दातून नहीं बेचेंगे, फिर भी कह देंगे कि हम लोग 50 हजार से 1 लाख तक कमा रहे हैं। आखिर हम लोग कैसे मान लें, हमारे आसपास जो लोग दुकान लगाए हैं, उनकी तो बिक्री नहीं हो रही। 200 से ज्यादा लड़के आए और दातून फेंककर चले गए
भदोही जिले से प्रेमचंद निषाद दातून का मोटा गट्ठर लेकर मेले में आए हैं। दो अन्य बोरियों में भी दातून लेकर आए हैं। कहते हैं- इस साल दातून नहीं बिक रही। कई लोग 300-400 किलोमीटर दूर से लेकर आए हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं। सब यहीं फेंककर चले गए। हमारे ही साथ यहां 200 से ज्यादा लड़के दातून लेकर बेचने आए थे। लेकिन, 10 दिनों में स्थिति देखकर लौट गए। हमने वजह पूछी तो कहते हैं, पिछले साल जो दुर्घटना हुई, उससे पब्लिक डर गई, वह आ नहीं रही है। प्रेमचंद वीडियो बनाने वालों से खफा हैं। वह कहते हैं- झूठ नहीं बोलना चाहिए। लोग वीडियो देखकर बेचने चले आए। साथ में बोरी भरकर दातून लेकर आए, लेकिन यहां परेशान हो गए। उन्हें लगा था कि खूब बिकेगी, लेकिन यहां कोई पूछ ही नहीं रहा। मुझे तो बताने में भी शर्म आ रही कि पिछले कुछ दिनों में कितने का बेचा। क्योंकि कोई बिक्री ही नहीं है। दातून बॉय आकाश यादव थार से आया
बीते महाकुंभ में आकाश यादव दातून बेचने की वजह से मशहूर हुए थे। आकाश जौनपुर के रहने वाले हैं। आकाश का कहना था, प्रेमिका के कहने पर दातून बेचने आए थे। यहां 1 लाख रुपए से ज्यादा कमाए। इसके बाद सोनी टीवी ने एक शो में भी बुलाया। उसके बाद मैं मशहूर हो गया। सोशल मीडिया पर आकाश का नाम ही दातून बॉय पड़ गया। इस माघ मेले में वह थार से पहुंचे। उनके साथ 30-40 लड़के भी आए। दातून बेचने के कई वीडियो बनाए और फिर सोशल मीडिया पर अपलोड किए। इसे देखकर ही कई लड़के प्रभावित हुए और मेले में पहुंचे। आकाश के अलावा कई और लोगों ने स्क्रिप्टेड वीडियो बनाए। उसमें दावा किया कि हर दिन 1 हजार से 2 हजार रुपए कमा रहे हैं। दैनिक भास्कर को अपनी पड़ताल में पता चला कि सोशल मीडिया पर जैसा दिखाया जा रहा, वैसा कुछ भी नहीं। दातून की बिक्री एकदम नहीं है। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि लोग घर से ब्रश-मंजन कर निकल रहे। जो यहां ठहरने आए हैं, वह अपने साथ लेकर आए हैं। ——————– ये खबर भी पढ़ें… यूपी में पाकिस्तानी मां-बेटी लापता, नागरिकता छिपा सरकारी नौकरी पाई, भांडा फूटते ही अंडरग्राउंड यूपी के जिला रामपुर से पाकिस्तानी मां-बेटी लापता हैं। दोनों पाकिस्तानी नागरिकता का फैक्ट छिपाकर सरकारी टीचर बनीं। जांच में पुष्टि हुई तो पहले सस्पेंशन, फिर बर्खास्तगी हुई। अब मां पर 3 दिन पहले रामपुर में FIR हुई है। कानूनी शिकंजा कसते ही मां-बेटी अंडरग्राउंड हो गई हैं। रामपुर में घर पर ताला लटका है। पढ़ें पूरी खबर