मेरठ की चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के परिसर से लगातार डोपिंग और नशीले इंजेक्शनों की वीडियो वायरल हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से अब तक कोई ठोस और कठोर कदम नहीं उठाया गया है। नशामुक्त परिसर और बेहतर साफ-सफाई को लेकर किए जा रहे प्रशासनिक दावे जमीनी स्तर पर पूरी तरह खोखले नजर आ रहे हैं। विश्वविद्यालय का सबसे अहम स्थान माने जाने वाले केंद्रीय पुस्तकालय के परिसर में बने टॉयलेट में प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शनों की सिरिंजें खुलेआम पड़ी मिली हैं। यही नहीं, तपोवन क्षेत्र के आसपास भी बड़ी संख्या में लावारिस सिरिंजें देखी गई हैं। ये घटनाएं प्रशासनिक दफ्तरों के बेहद पास सामने आई हैं। एक ओर प्रशासन स्वच्छ और नशामुक्त परिसर का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। छात्र नेताओं में आक्रोश इस गंभीर मामले को लेकर छात्र नेताओं में भारी नाराज़गी है। छात्र नेता विनीत चपराना ने इसे विश्वविद्यालय की गरिमा पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी लगभग शून्य है। यह स्थिति छात्रों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। विनीत चपराना ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि परिसर के भीतर नशे जैसी गतिविधियों में शामिल लोगों को बेनकाब किया जाना चाहिए। पूर्व छात्र संघ महामंत्री अंकित अधाना ने भी कहा कि नशामुक्ति के नाम पर किए जा रहे सभी दावे केवल फोटो और प्रचार तक सीमित रह गए हैं। प्रशासनिक दफ्तरों के पास नशीली सिरिंजों का मिलना यह साफ दर्शाता है कि परिसर में असामाजिक तत्व बेखौफ घूम रहे हैं और प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। निगरानी टीम की बड़ी नाकामी प्रशासनिक दफ्तरों की नाक के नीचे प्रतिबंधित इंजेक्शनों का मिलना निगरानी टीम की घोर विफलता को उजागर करता है। छात्रों का कहना है कि केवल औपचारिक निरीक्षण और दिखावटी अभियानों से नशाखोरी पर लगाम नहीं लगाई जा सकती। राज्यपाल भी जता चुकी हैं चिंता पहले भी दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी विश्वविद्यालय में ड्रग्स सेवन का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि उनके संज्ञान में आया है कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं। खासतौर पर उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई छात्रा इस तरह की गतिविधियों में शामिल होती है तो इसका असर केवल उस पर ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। छात्रों की प्रमुख मांगें छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि – पूरे परिसर में मजबूत और प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए साथ ही नशाखोरी के खिलाफ जगह-जगह चेतावनी वाले पोस्टर लगाए जाएं और संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गश्त बढ़ाई जाए और पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।