मेरठ जेल में बंद पारस ने पूछा- कैसी है रूबी:याचिका दायर करने वाले अधिवक्ताओं ने पारस सोम से की मुलाकात, फूफा रहे साथ मौजूद

मेरठ में हत्या-अपहरण के आरोप में जेल की सलाखों के पीछे बंद पारस सोम ने रूबी से प्रेम प्रसंग की बातों को स्वीकार किया है। गुरुवार को पारस के परिवार की तरफ से याचिका दायर करने वाले अधिवक्ताओं ने पारस से मुलाकात की तो उसका पहला सवाल था- रूबी कैसी है? बाद में उसने परिवार के बारे में पूछा। उसे बताया गया कि केस ट्रांसफर के लिए याचिका डाली गई है। पारस बोला- रूबी कैसी है, कहां है जेल में पारस चुपचाप अपने वकीलों की बात सुन रहा था। उसने कहा कि वह अखबार में पढ़ चुका है कि याचिका डाली गई है। कुछ पल वह चुप रहा, फिर अचानक बोला- रूबी कैसी है? जवाब मिलने के बाद उसने अपने परिवार और गांव के बारे में भी पूछा। इसके बाद अधिवक्ताओं ने उससे पूरा घटनाक्रम जाना। अधिवक्ताओं के मुताबिक पारस ने स्वीकार किया कि उसका रूबी संग प्रेम प्रसंग चल रहा है। वह दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन रूबी के परिवार ने पहले ही उसकी शादी तय कर दी। 22 जनवरी को याचिका पर सुनवाई याचिका दायर होने के बाद गुरुवार को पहली बार पारस सोम से अधिवक्ता संजीव राणा व बलराम सोम ने मुलाकात की। इस दौरान पारस के एक रिश्तेदार भी साथ रहे। करीब एक घंटे तक तीनों पारस के साथ रहे। दोनों अधिवक्ताओं ने पारस को बताया कि वह नाबालिग है। कानून के लिहाज से उसका केस जेजे बोर्ड में चलना चाहिए। इसीलिए याचिका डाली है। 22 जनवरी को सुनवाई होगी। अब पूरी घटना को जानिए… 8 जनवरी की सुबह मेरठ के सरधना थाना क्षेत्रांतर्गत स्थित ग्राम कपसाड़ निवासी पारस सोम खेत पर अनुसूचित जाति की महिला सुनीता के साथ काम कर रही उसी बेटी रूबी को अगवा कर ले गया। विरोध पर उसने सुनीता पर बलकटी से वार कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। बाद में सुनीता की अस्पताल में मौत हो गई। सुनीता की मौत से गांव में तनाव सुनीता की मौत से गांव में तनाव फैल गया। पुलिस की 10 टीमें दोनों को तलाशने में जुट गईं। दो दिन तक दोनों को पुलिस तलाशती रही। 10 जनवरी की रात पुलिस को दोनों की सहारनपुर में मौजूद होने की सूचना मिली, जिसके बाद पुलिस ने पारस सोम को गिरफ्तार करते हुए रूबी को सकुशल बरामद कर लिया। पारस को जेल, रुबी को आशा ज्योति केंद्र भेजा 11 जनवरी को पुलिस ने पारस को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। रूबी के बयान दर्ज होने के बाद उसे आशा ज्योति केंद्र भेजा गया। 12 जनवरी को आशा ज्योति केंद्र में काउंसलिंग के बाद रूबी परिजनों की सुपुर्दगी में घर भेज दी गई। 11 से जेल में बंद है पारस सोम अपहरण व हत्या के आरोप में पारस सोम 11 जनवरी से जेल की सलाखों के पीछे बंद है। उसे 19 नंबर बैरक जोकि मुलाहिजा बैरक है, उसमें रखा गया। रूबी के घर पहुंचने के बाद से गांव में सुरक्षा बढ़ाई गई है। किसी भी बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। केवल कपसाड़ के लोगों को ही आधार कार्ड देखकर प्रवेश दिया जा रहा है। मीडिया की भी एंट्री बंद कर दी गई है। उम्र को लेकर याचिका हुई दायर पारस की उम्र को लेकर शुरु से ही सवाल उठाए जा रहे हैं। उसको नाबालिग बताया जा रहा था लेकिन साक्ष्य ना होने के कारण कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अब परिजनों ने उम्र से जुड़े साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में याचिका दायर की है। तीन अधिवक्ताओं बलराम सोम, संजीव राणा और विजय शर्मा के पैनल ने वकालतनामा दाखिल किया है। न्यायालय ने 22 जनवरी की तिथि याचिका पर सुनवाई के लिए तय की है।