‘मेरे सामने बच्चे की चोट पर फेवीक्विक लगाया’:मेरठ में पिता बोले- मुझसे ही मंगवाया, भगवान किसी के बेटे को ऐसा दर्द न दें

बच्चे का खून देखकर मैं घबरा गया था। जल्दी से अस्पताल भागा। अस्पताल स्टॉफ ने बताया- घाव गहरा है। उसे असहनीय दर्द हो रहा था। मैंने टांके का विकल्प पूछा। मुझे क्या पता था वे ऐसा करेंगे। मुझसे ही फेवीक्विक मंगाया। मेरे सामने ही बच्चे की आंख के ऊपर लगी चोट पर फेवीक्विक लगा दिया ये कहना है ढाई साल के मासूम मनराज के पिता सरदार जसपिंदर सिंह का। मेरठ के सरदार जसपिंदर के बेटे की चोट पर भाग्यश्री अस्पताल में फेवीक्विक डाल कर चिपका दिया गया था। अस्पताल की इस लापरवाही की वजह से बच्चा रात भर दर्द से तड़पता रहा। उसकी तकलीफ बयां करते हुए पिता की आंखें भर आईं। वह रुंधे गले से कहते हैं कि भगवान किसी के बेटे को ऐसा दर्द न दें। हम लोगों ने सीएमओ डॉ.अशोक कटारिया से शिकायत की है। उन्होंने अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है ताकि भविष्य में किसी के साथ ऐसा न हो। वहीं, अस्पताल के डॉयरेक्टर का कहना है कि बच्चे का इलाज टेक्नीशियन ने किया। 2 तस्वीरें देखिए… पिता बोले- खून देखकर घबरा गया
बच्चे के पिता जसपिंदर सिंह ने बताया कि 17 नवंबर की रात मेरे बेटे को खेलते हुए आंख के ऊपर चोट लगी थी। गहरी चोट लगने से खून निकलने लगा। मैं तुरंत उसे लेकर भाग्यश्री हॉस्पिटल पहुंचा। वहां मैंने सिर्फ इतना कहा कि मेरे बच्चे को टांके के निशान न दिखे। अगर ऐसा कुछ हो जाए तो आप देख लीजिए। स्टाफ ने कहा- आप परेशान न हों। तुरंत बाहर से जाकर एक फेवीक्विक लेकर आइए। मैं भागा-भागा और पास की दुकान से फेवीक्विक लेकर आया। बेटा अपनी मां इरविन कौर की गोद में था। स्टाफ ने मेरे हाथ से फेवीक्विक लिया और उसकी चोट के ऊपर डालते हुए उसे बंद कर दिया। कुछ समझने का मौका तक नहीं मिला
बच्चे के पिता ने कहा, ‘जब तक मैं कुछ समझ पाता इससे पहले अस्पताल के स्टाफ ने बच्चे का घाव बंद कर दिया। मैंने आपत्ति जताई। फिर बोला- कम से कम एक टेटनेस का इंजेक्शन तो लगा दीजिए।’ उन्होंने कहा- आप सुबह ले आना तब लगा देंगे। उसके बाद मैंने पूछा कि इस पर कोई पट्टी या बैंडेज कर दीजिए तो उन्होंने इसके लिए मना कर दिया। पूरी रात नहीं सो पाया परिवार
जसपिंदर ने बताया कि फेवीक्विक चोट पर डालने के बाद बच्चे का दर्द बेतहाशा बढ़ गया। वह रातभर दर्द से रोता-चिल्लाता रहा। परिवार वाले भी सुबह तक उसके साथ जागते रहे। सुबह होते ही हम सब लोकप्रिय अस्पताल उसे लेकर भागे। वहां डॉ. सिद्धार्थ को दिखाया। करीब 3 घंटे तक उन्होंने बच्चे का इलाज किया। चोट पर से फेवीक्विक किसी तरह हटाया गया। फिर चोट को साफ करके उन्होंने कई टांके लगाकर उसे बंद किया। टांके लगने के बाद बच्चे का दर्द थोड़ा कम हुआ। डॉक्टर ने बताया- चोट गहरी थी, इंफेक्शन का भी था डर पिता ने बताया कि डॉ.सिद्धार्थ के अनुसार चोट गहरी थी और फेवीक्विक की वजह से इंफेक्शन का भी खतरा था। उन्होंने साफ-सफाई करने के बाद टांके लगाने की बात कही तो उनसे भी उसका विकल्प पूछा। उन्होंने कहा- टांका लगाना जरूरी है। टांका लगने के बाद बच्चे को लेकर हम सभी घर आ गए। अब हर तीन दिन में उसकी पट्‌टी बदली जाती है। बच्चे को जब थोड़ी राहत मिली तो मैं भाग्यश्री अस्पताल गया। वहां उनकी लापरवाहियों की शिकायत की। लेकिन सुनने की बजाय मौजूद डॉक्टर ने धमकाने के अंदाज में बहस न करने की बात कही। सीएमओ ने दिए जांच के आदेश चोट का फेवीक्विक से इलाज करने के मामले में परिजन की शिकायत पर सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया ने दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। इसमें एक डिप्टी सीएमओ और एक सर्जन शामिल हैं। जांच टीम पूरी रिपोर्ट सौंपेगी। अब जानिए पूरा मामला…
मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन के मेपल्स हाई में रहने वाले सरदार जसपिंदर सिंह का फाइनेंस का बिजनेस है। सोमवार की रात को उनके 2.5 साल के बेटे को खेलते समय चोट लग गई। उसके आंख के ऊपर टेबल का एक कोना धस गया। बाई आंख के ऊपर गहरा कट होने से काफी खून बहने लगा। बच्चे की चोट से खून बहता देख परिजन घबरा गए। मां इरविन कौर ने बताया कि हम लोग बेटे को गढ़ रोड स्थित भाग्यश्री अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर ने जसपिंदर से फेवीक्विक लाने को कहा। वह भागकर बाहर एक दुकान में पहुंचे और फेवीक्विक खरीदकर वापस लौटे। उनके वापस आते ही स्टॉफ ने फेवीक्विक लिया और कोई कुछ समझ पाता इसके पहले उसने बेटे की चोट पर फेवीक्विक डाली और बंद कर दिया। फेवीक्विक के घाव में जाते ही बच्चा जोर-जोर से रोने लगा। उसके पिता ने पूछा कि बच्चा क्यों रो रहा है? स्टाफ और डॉक्टर ने जवाब दिया कि बच्चा घबरा गया है। इस कारण से वह रो रहा है। परिजन उसे घर ले गए। मगर वह पूरी रात दर्द के कारण रोता रहा। मंगलवार (18 नवंबर) को परिजन बच्चे को लोकप्रिय अस्पताल लेकर पहुंचे। परिजन ने बताया कि जब वे लोग बेटे को लेकर लोकप्रिय अस्पताल पहुंचे तो वहां डॉ.सिद्धार्थ मिले। वह चोट पर फेवीक्विक देखकर हैरान रह गए। उन्होंने बिना देर किए बेटे के चोट पर से फेवीक्विक हटवाया। करीब 3 घंटे में फेवीक्विक हटी तो फिर घाव साफ किया। इसके बाद टांके लगाए। भाग्यश्री अस्पताल के डायरेक्टर बोले- हमने मेडिकल ग्लू लगाया भाग्यश्री अस्पताल के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुनील पाल ने बताया कि अस्पताल में उस समय डॉक्टर नहीं थे। हमने बच्चे को मेडिकल ग्लू ही लगाया था। परिजनों का आरोप ये है कि हमसे फेविक्विक मंगाई और हमारे सामने लगाई। ये बिल्कुल निराधार है। अगर उनके सामने लगाई जा रही थी तो उनको तत्काल विरोध करना चाहिए था। उस दिन अस्पताल में सोनी नाम के टेक्नीशियन ने बच्चे का इलाज किया था। उस कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया है। पिता बोले- अस्पताल सीसीटीवी फुटेज जारी करे बच्चे मनराज के पिता जसपिंदर सिंह ने बताया- मेरे से ही स्टाफ ने फेवीक्विक मंगवाकर बच्चे के घाव पर लगाई थी। अस्पताल में लगे सीसीटीवी में यह सब रिकाॅर्ड है। अगर अस्पताल में ऐसा नहीं हुआ है तो प्रबंधन को सीसीटीवी फुटेज जारी करना चाहिए। ——————— ये खबर भी पढ़ें… ढाई साल के बच्चे को फेवीक्विक लगाने वाला सस्पेंड:आंख के ऊपर लगी चोट को चिपकाया था, हॉस्पिटल के डायरेक्टर बोले- पैरेंट्स झूठ बोल रहे मेरठ में ढाई साल के बच्चे को घर में खेलते समय मेज का कोना आंख के ऊपर लग गया। चोट लगने से बच्चे की आईब्रो के नीचे खून बहने लगा। पैरेंट्स बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास गए। जहां उन्होंने टांके लगाने के बजाय फेवीक्विक लगा दी। उसे 12 घंटे तक असहनीय दर्द हुआ। इसके बाद परिजन उसे दूसरे अस्पताल लेकर गए। जहां फेवीक्विक को हटाने में 3 घंटे लग गए। इसके बाद डॉक्टरों ने घाव को खोलकर 5 टांके लगाए। पढ़ें पूरी खबर…