मैनपुरी जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने शिवसिंहपुर के स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में ढिलाई पर सख्त नाराजगी जताई और शिक्षकों को बच्चों के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने की नसीहत दी। निरीक्षण के दौरान, डीएम ने शिक्षकों से स्पष्ट कहा कि उनकी बौद्धिक क्षमता फाइलों में नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य में चमक के रूप में दिखनी चाहिए। उन्होंने अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें स्कूल भेजने की जिम्मेदारी भी शिक्षकों की बताई। जिलाधिकारी ने मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था का भी जायजा लिया और चेतावनी दी कि मेन्यू से किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “बच्चों का पेट आधा भरा और पढ़ाई आधी-अधूरी, यह व्यवस्था नहीं चलेगी।” उन्होंने साफ-सफाई, शौचालय, पेयजल, रसोईघर और ऑपरेशन कायाकल्प के तहत निर्धारित 19 मापदंडों पर भी स्टाफ से जवाब मांगा। निरीक्षण में सामने आया कि प्राथमिक विद्यालय में कुल 69 बच्चों में से केवल 52 उपस्थित थे। हालांकि, कक्षा 1 से 5 तक उपस्थिति 70 से 100 प्रतिशत के बीच रही, जबकि पूर्व माध्यमिक स्तर पर कक्षा 7 और 8 में 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे डीएम को कुछ राहत मिली। आज बच्चों को मध्यान्ह भोजन में तहरी और दूध परोसा गया, जिसकी गुणवत्ता की जांच डीएम ने मौके पर की। कुछ शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, जिनमें सहायक अध्यापिका किरण देवी अवकाश पर बताई गईं। डीएम ने स्टाफ को कड़े निर्देश दिए कि “स्कूल सरकारी है, लेकिन जिम्मेदारी निजी भाव से निभानी होगी।” उन्होंने जाते-जाते यह भी कहा कि उनकी अगली विजिट कभी भी हो सकती है, इसलिए व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए, अन्यथा कार्रवाई तय है। इस दौरान खंड शिक्षाधिकारी रवि प्रकाश, अनिल सक्सेना और अनुज कुमार भी मौजूद रहे।