उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कार्यशाला को सामयिक और उपयोगी बताते हुए कहा कि डिजिटल युग में साइबर उपयोग जीवन की जरूरत बन गया है। कोविड के बाद ई-कॉमर्स में 60-70% वृद्धि हुई है और सोशल मीडिया पर युवाओं की सक्रियता बढ़ी है, लेकिन साइबर दुरुपयोग की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। सोमवार को डीजीपी कानपुर के हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) में आयोजित साइबर जागरूकता एवं महिला सशक्तिकरण कार्यशाला का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारंभ कर रहे थे। डिजिटल अरेस्ट बड़ा खतरा बनकर उभरा डीजीपी ने युवाओं में साइबर गेमिंग की लत जैसी चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज पर साइबर अपराध का प्रभाव पड़ रहा है। स्कूली बच्चे साइबर बुलिंग, महिलाएं साइबर स्टॉकिंग का शिकार हो रही हैं।डिजिटल अरेस्ट एक बड़ा उभरता खतरा, जिसमें सभ्रांत वर्ग जीवनभर की कमाई गंवा चुका है। लालच, भय और लापरवाही की वजह से आर्थिक अपराध बढ़े हैं। 1930 पर करें जल्द से जल्द शिकायत इसके बचाव के लिए 1930 हेल्पलाइन नंबर, गोल्डन टाइम में रिपोर्ट करना और सही जानकारी दर्ज कराना जरूरी है। इसके अलावा बच्चों-युवाओं में सजगता भी जरूरी है। खासक ऑनलाइन गेमिंग के दुष्प्रभाव और सोशल मीडिया की लत से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने पुलिस अफसरों से कहा कि साइबर जांच एसओपी आधारित और सरल है। थाना प्रभारी इसे सीखें और लागू करें। उन्होंने ये भी कहा कि इस खतरे से बचने के लिए नागरिक सहभागिता भी जरूरी है। इसके लिए मजबूत पासवर्ड, अपडेटेड सॉफ्टवेयर और सतर्कता बहुत जरूरी है।डीजीपी ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस साइबर अपराध मुक्त राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और यह तभी संभव जब जनता-पुलिस साथ हों। पुलिस साइबर क्राइम नियंत्रण में सशक्त कार्रवाई कर रही है। कमिश्नरेट कानपुर नगर पुलिस की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल, जिलाधिकारी कानपुर नगर, व्यापार मंडल के सदस्य, उद्योगपति, बैंकर, छात्र, शिक्षक, एनजीओ प्रतिनिधि तथा पुलिस अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।