यूजीसी 2026 को लेकर सामान्य समाज नाराज़:सुप्रीम कोर्ट की रोक का स्वागत,लेकिन यूजीसी पर आंदोलन जारी

यूजीसी के विरोध में रविवार को मेरठ में सामान्य समाज की एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। 1857 क्रांति मंच के आह्वान पर यह बैठक भगवान परशुराम मंदिर, गांधी आश्रम के पास संपन्न हुई, जिसमें सामान्य समाज से जुड़े विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र, किसान और व्यापारी वर्ग के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक की शुरुआत में केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नई यूजीसी पर माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक के फैसले का स्वागत करते हुए न्यायालय के प्रति आभार जताया गया। बैठक में वैश्य समाज, क्षत्रिय समाज (करणी सेना, क्षत्रिय महासभा, राजपूत सभा), ब्राह्मण समाज (पंडित एवं त्यागी समाज), महिला प्रतिनिधि, छात्र संगठन और सामान्य समाज के अन्य सामाजिक संगठनों की व्यापक भागीदारी रही। नियमों पर गंभीर आपत्ति बैठक में सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकाला गया कि यूजीसी में सामान्य समाज के छात्रों और शिक्षण संस्थानों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई है। वक्ताओं ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि पूर्व में लागू यूजीसी ,2018 में झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर कार्रवाई के जो प्रावधान थे, उन्हें नए नियमों से हटा दिया गया है, जिससे शिकायत प्रणाली के दुरुपयोग का खतरा बढ़ गया है। केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा ज्ञापन बैठक के बाद 1857 क्रांति मंच की ओर से केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया, जिसमें प्रमुख मांगें शामिल हैं— • झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों को खारिज करने के स्पष्ट प्रावधान पुनः जोड़े जाएं। • राज्य शैक्षणिक संस्थानों की प्रशासनिक और शैक्षणिक स्वायत्तता सुरक्षित रखी जाए। • सामान्य समाज के छात्रों एवं संस्थानों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस प्रावधान किए जाएं। बैठक में आंदोलन को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। तय किया गया कि सामान्य समाज के जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साा ही राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों व वरिष्ठ नेताओं से संपर्क किया जाएगा और हस्ताक्षर अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम चलाए जाएंगे ,सामान्य समाज की एक समन्वय समिति गठित की जाएगी और सोशल मीडिया के जरिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते संशोधन नहीं किए, तो गांव-गांव जनजागरण अभियान, पंचायतें और मेरठ में बड़ी महापंचायत का आयोजन किया जाएगा। नेताओं के बयान अभिमन्यु त्यागी ने कहा, यूजीसी , 2026 सामान्य समाज के छात्रों और शिक्षण संस्थानों के अधिकार कमजोर कर रहे हैं। यदि संशोधन नहीं हुए, तो यह आंदोलन पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैलाया जाएगा। ठाकुर संजय सोम ने कहा, यह लड़ाई पूरे सामान्य समाज के भविष्य की है। असंतुलित नियम शिक्षा व्यवस्था में अराजकता पैदा कर सकते हैं। दीपक शर्मा (चोटी) ने कहा, झूठी शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था हटाना बेहद खतरनाक है। इससे शिक्षकों और संस्थानों का उत्पीड़न बढ़ेगा। अरविंद शर्मा और पंडित नवीन शर्मा ने कहा, संविधान के अनुसार शिक्षा केंद्र और राज्यों का साझा विषय है। यूजीसी को केवल मानक निर्धारण तक सीमित रहना चाहिए। बैठक के दौरान लोगों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार एक तरफ एकजुट भारत की बात करती है, लेकिन ऐसे नियम लाकर समाज को जातियों में बांटने का काम कर रही है। वक्ताओं ने कहा कि नई यूजीसी व्यवस्था सामाजिक संतुलन के खिलाफ है। बैठक के दौरान “वंदे मातरम”,“भारत माता की जय” और “जो स्वर्ण हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा” जैसे नारे लगाए गए। अन्य वक्ताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि यदि सरकार ने संवाद का रास्ता नहीं अपनाया, तो सामान्य समाज सड़क से संसद तक अपनी आवाज उठाएगा। बैठक में अभिमन्यु त्यागी, संजय सोम, दीपक शर्मा, अरविंद शर्मा, अभिषेक सोम, सागर रस्तोगी, रंजन शर्मा, सुमित शर्मा (पार्षद), गौरव शर्मा, डॉ. सचिन त्यागी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।