यूपी में प्रतापगढ़ के कुंडा से अब राजा भैया की पत्नी और दोनों बेटियां वोटर नहीं रहीं। SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद उनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए। इस पर पत्नी भानवी सिंह ने सख्त विरोध जताया। भानवी ने चुनाव आयोग और सीएम योगी के नाम पत्र लिखा है। इसमें पूछा है कि आखिर उनके नाम किस आधार पर वोटर लिस्ट से हटाए गए? भानवी सिंह ने वोटर लिस्ट पोस्ट की
भानवी सिंह ने सोशल मीडिया पर 2003 और 2025 की वोटर लिस्ट भी पोस्ट की है। 2025 की वोटर लिस्ट में भानवी का नाम कुंडा विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र- 87 (पूर्व माध्यमिक विद्यालय बेंती) में वार्ड नंबर-15 में दर्ज था। इसकी क्रम संख्या 8047 है। इसी तरह इस वोटर लिस्ट में क्रम संख्या 8041 से 8052 के बीच राजा उदय प्रताप सिंह, उनकी पत्नी मंजुल राजे, अक्षय प्रताप सिंह, संजय सिंह, रघुराज प्रताप सिंह, रमेश पाल सिंह, राघवी कुमारी, विजय राजेश्वरी, कुंवर शिवराज प्रताप सिंह और कुंवर बृजराज प्रताप सिंह के नाम दर्ज हैं। वहीं, 2003 की मतदाता सूची में भानवी सिंह का नाम क्रम संख्या- 95 पर मकान नंबर- 1021 के तौर पर दर्ज है। इस मकान संख्या पर अन्य सदस्यों के तौर पर रघुराज प्रताप सिंह, मंजुल राजे, राजा उदय प्रताप सिंह, संजय सिंह, रमेश पाल सिंह और अक्षय प्रताप सिंह का भी नाम दर्ज है। अंतरिम सूची में काटा गया भानवी और बेटियों का नाम SIR के बाद जो अंतरिम सूची प्रकाशित हुई है, उसमें भानवी सिंह, उनकी बेटियों राघवी कुमारी और विजय राजेश्वरी कुमारी का नाम हटाया गया है। भानवी ने आरोप लगाया है कि दबाव में अधिकारियों ने जानबूझकर ऐसा किया है। भानवी सिंह ने लिखा- यह ऐसा निर्णय है, जो खुली आंखों से दिखने वाला पक्षपात लग रहा। मेरा नाम SIR के बाद साल- 2003 की मतदाता सूची में दर्ज था। इसके सभी सबूत भी संलग्न कर रही हूं। 2025 की मतदाता सूची में भी मेरा और मेरी दोनों बेटियों का नाम दर्ज था। इसके बावजूद बिना किसी पूर्व सूचना, बिना आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिए मेरा और दोनों बेटियों का नाम नई वोटर लिस्ट से काट दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया में न तो पारदर्शिता का पालन किया गया और न ही विधि सम्मत सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई। भानवी ने लिखा- भदरी, बेंती परिवार की बहू हूं
भानवी ने लिखा है कि वह भदरी, बेंती परिवार की बहू हैं। रघुराज प्रताप सिंह उनके पति हैं। विवाद के बावजूद उनका, उनकी बेटियों का परिवार और घर सामाजिक, कानूनी हर दृष्टि से, बेंती कुंडा (प्रतापगढ़) ही है। वह और उनकी बेटियां यहां की स्थायी निवासी और मतदाता रही हैं। 2003 की सूची में नाम, तो कैसे काटा दिया
भानवी ने लिखा कि इसके बावजूद उनके लोकतांत्रिक अधिकार को छीनने का यह प्रयास न केवल पीड़ादायक है, बल्कि चिंताजनक भी है। उन्होंने सीधा सवाल पूछा कि चुनाव आयोग ने साफ कहा था कि किसी का नाम नहीं कटेगा। ऐसे में अधिकारी किसकी शह पर इस तरह का मनमाना काम कर रहे? क्या यह खुला पक्षपात नहीं है? क्या एक ही परिवार में पुरुषों का नाम सुरक्षित रखते हुए महिलाओं का नाम काटा जाना न्यायसंगत है? अगर इसी तरह मतदाता सूची बनाई जाएगी, तो क्या हम एक निष्पक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था की उम्मीद कर सकते हैं? क्या लोकतंत्र उन अधिकारियों के भरोसे छोड़ा जा सकता है, जो जमीनी सच्चाई के बजाय पक्षपात, दबाव या मनमाने निर्णय के आधार पर यह तय करें कि कौन मतदाता है और कौन नहीं? पूछा- किसके दबाव में किस अधिकारी ने काटा नाम
भानवी सिंह ने सीएम योगी और चुनाव आयुक्त को संबोधित करते हुए लिखा है कि वे प्रतापगढ़ में किसी भी व्यक्ति से पूछ लें। हर कोई बताएगा कि यह अन्याय है। इसे समझने के लिए किसी जांच की भी जरूरत नहीं। उन्होंने आग्रह किया है कि राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल उनके लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के लिए न किया जाए। उनका और उनकी दोनों बेटियों का नाम तत्काल प्रभाव से मतदाता सूची में फिर से जोड़ा जाए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि किस अधिकारी द्वारा और किस आधार पर और किसके दबाव में उनका और बेटियों का नाम काटा गया। संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। जिससे भविष्य में किसी भी नागरिक के साथ ऐसा अन्याय न हो। भानवी सिंह ने लिखा है कि यह पत्र केवल उनके परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि यह सवाल है कि क्या इस देश में नागरिक का मताधिकार सुरक्षित है या नहीं? वह और उनकी बेटियां आज भी अपने अधिकार की प्रतीक्षा में हैं।