रामायण बेला की रामकथा में पहुंचे पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह:जगद्गुरु रत्नेशप्रपन्नाचार्य बोले-भारतीय संस्कृति में श्रीराम और माता सीता आदर्श दंपति

जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज के संयोजन में आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामायणवेला प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हो रहा है। इस अवसर पर कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह सहित सैकड़ो संत महंत उपस्थित रहे। दिव्य प्रबंध पाठ और नयनोन्मिलन जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान विधि-विधान से हुए महोत्सव के अंतर्गत विविध वैदिक अनुष्ठानों का आयोजन कर सनातन परंपराओं की गरिमा को सजीव रूप दिया जा रहा है।महोत्सव के दौरान सर्वबिंब प्रतिष्ठा, चतुस्स्थान पूजन, दिव्य प्रबंध पाठ और नयनोन्मिलन जैसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न हुए। इसके साथ ही सप्त पूजा, कन्या पूजा, दम्पति पूजा, ब्राह्मण पूजा एवं आचार्य पूजा का आयोजन कर धर्माचार्यों ने वैदिक संस्कृति की महत्ता को रेखांकित किया। 108 कलशों विभिन्न नदियों और औषधीय के जल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के उद्घोष के साथ अनुष्ठानों में सहभागिता की। वहीं भगवान श्रीराम, माता जानकी और हनुमान जी महाराज की प्राण-प्रतिष्ठा 27 फरवरी, शुक्रवार को हवन-पूजन के साथ संपन्न होगी। इसको लेकर मंदिर परिसर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। दूर-दराज से संत-महात्मा और श्रद्धालु बड़ी संख्या में अयोध्या पहुंच रहे हैं।
प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर आयोजित श्री वाल्मीकि रामायण कथा में जगद्गुरु रत्नेशप्रपन्नाचार्य महाराज ने श्रीराम-सीता के आदर्श दांपत्य जीवन पर प्रकाश डाला। श्रीराम-सीता से प्रेरणा लेकर जीवन को प्रेम, त्याग और मर्यादा से परिपूर्ण बनाएं उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में श्रीराम और माता सीता आदर्श दंपति के रूप में पूजनीय हैं। श्रीराम ने मर्यादा का पालन कर आदर्श पति और पुरुषोत्तम का पद प्राप्त किया, वहीं माता सीता ने अपने पतिव्रता धर्म के पालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। सीताराम विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया उन्होंने उपस्थित दंपतियों से आह्वान किया कि वे श्रीराम-सीता के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने दांपत्य जीवन को प्रेम, त्याग और मर्यादा से परिपूर्ण बनाएं।कथा के दौरान जगदगुरु ने ने प्रभु सीताराम विवाह प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। स्वयंवर, धनुष भंग और वैदिक रीति से संपन्न दिव्य विवाह का भावपूर्ण चित्रण सुनकर उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा पंडाल ‘सीताराम’ के जयघोष से गूंज उठा।