अभिनेता और कॉमेडियन राकेश बेदी वाराणसी पहुंचे वह यहां काशी की प्रसिद्ध संकरी गलियों में रिक्शा से घूमे। इसका उन्होंने एक वीडियो अपने इंस्टाग्राम पेज पर 5 मार्च को पोस्ट किया है। उन्होंने वीडियो में कहा – नमस्ते दोस्तों, मैं राकेश बेदी हूं। मैं वाराणसी में हूं और रिक्शे पर बैठकर काशी विश्वनाथ मंदिर जा रहा हूं। यह मेरी पहली रिक्शा यात्रा है। यहां बहुत भीड़ है और ट्रैफिक भी है। बनारस की गलियों में रिक्शा की यह छोटी-सी यात्रा उनके लिए एक मजेदार एडवेंचर बन गई। 2 तस्वीरें देखिये- राकेश बेदी बोले- पंगे लेते रहना चाहिए 55 सेकंड के वीडियो में राकेश बेदी एक रिक्शे में बैठे दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी ऐसे छोटे-छोटे एडवेंचर लेने में मज़ा आता है। उन्होंने कहा की मैंने सोचा थोड़ा बाहर निकलूं। मजा आएगा। क्या है कभी कभी पंगे लेते रहना चाहिए। वीडियो में उन्होंने कहा कि लगभग 10 मिनट की सवारी के बाद मैं मंदिर पहुंच गया। राकेश बेदी ने कहा – वाराणसी की तंग और ऐतिहासिक गलियां दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। यहां पैदल चलना भी कई बार चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन साइकिल रिक्शा या पैदल घूमना शहर के असली माहौल को महसूस करने का अनोखा तरीका माना जाता है। एयर इंडिया के क्रू की भी की सराहना इस यात्रा से जुड़ा एक और दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए राकेश बेदी ने एयर इंडिया की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि 35,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान के दौरान एयर इंडिया के क्रू मेंबर्स ने उन्हें एक स्नेहभरा पत्र दिया। पत्र में क्रू ने लिखा था कि वे वर्षों से उन्हें स्क्रीन पर देखते आ रहे हैं और उनकी कॉमेडी व अभिनय से प्रेरित होते हैं। उन्होंने उस मेंबर के साथ वाराणसी एयरपोर्ट पर वीडियो भी बनाया। अब जानते हैं कौन हैं अभिनेता राकेश बेदी राकेश बेदी का जन्म 1 दिसंबर 1954 में हुआ। बेदी ने अपनी पढ़ाई दिल्ली में पूरी की। उन्होंने दिल्ली के एंड्रयूजगंज स्थित केंद्रीय विद्यालय में दाखिला लिया। बेदी स्कूल में पढ़ते समय मोनो एक्टिंग प्रतियोगिताओं में भाग लिया करते थे। बेदी ने नई दिल्ली के थिएटर समूह पियरोट्स ट्रूप के साथ भी काम किया है और पुणे स्थित फिल्म और टेलीविजन संस्थान में अभिनय का अध्ययन किया है। उन्हें चश्मे बद्दूर (1981) और मेरा दामाद (1985) जैसी फिल्मों में उनकी प्रतिष्ठित हास्य भूमिकाओं के लिए जाना जाता है। 2025 में, धुरंधर में उनकी नाटकीय भूमिका के लिए उनकी काफी प्रशंसा की गई । वह ये जो है जिंदगी (1984), श्रीमान श्रीमती (1994-1997), यस बॉस (1999-2009), भाभी जी घर पर हैं (2015-वर्तमान), और तारक मेहता का उल्टा चश्मा (2020-वर्तमान) जैसे टेलीविजन शो में भी दिखाई दिए हैं। ……………………………. ये खबर भी पढ़िए – बाघ ने गैंडे का शिकार किया, उस पर बैठा रहा, दुधवा में तालाब में घुसकर हमला किया, गर्दन चीरकर मांस खाया लखीमपुर खीरी के दुधवा नेशनल पार्क में बाघ ने एक मादा गैंडे पर हमला कर दिया। मोटी चमड़ी की वजह से काफी देर तक उस पर पंजों से वार करता रहा। जबड़े में उसकी गर्दन दबा ली। थोड़ी देर में घायल गैंडे की मौत हो गई। इसके बाद बाघ उसके ऊपर चढ़कर बैठ गया। गर्दन चीरकर मांस खाता रहा। पूरी खबर पढ़ें