सहारनपुर में बुधवार शाम रिटायर्ड ITBP जवान ने खुद को गोली मारकर सुसाइड कर लिया। खेत में अपनी लाइसेंसी पिस्टल से खुद को गोली मारी। सुसाइड से पहले उसने पत्नी को फोन किया था। बताया कि खुद को गोली मारकर जान देने जा रहा हूं, मुझे माफ करना। जब तक घर के लोग खेत पहुंचे, उसकी मौत हो चुकी थी। मृतक की पहचान गागलहेड़ी के नवादा गांव निवासी अक्षय यादव (53) के रूप में हुई। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। सीओ सदर प्रिया यादव ने बताया कि अक्षय तीन साल से डिप्रेशन में चल रहे थे। सिक्योरिटी एजेंसी चलाते थे अक्षय
अक्षय ITBP से रिटायर होने के बाद एक सिक्योरिटी एजेंसी चला रहे थे। पिछले कुछ साल से वह पत्नी और दो बेटे के साथ चकहरेटी रोड पर रह रहे थे। जबकि, नेवादा गांव में उनका आना-जाना लगा रहता था। यहीं खेती भी देखते थे। पत्नी बोली- मुझे समझाने का मौका ही नहीं दिया
पत्नी ने पुलिस को बताया- बुधवार शाम करीब 5.30 बजे अक्षय घर से नेवादा में खेत के लिए गए थे। करीब 6 बजे उन्होंने खेत से ही मुझे फोन किया। रोने लगे और कहा- मुझे माफ करना। अब मैं खुद को गोली मार रहा हूं। मुझे माफ करना। पत्नी ने बताया- मैं उन्हें कुछ समझाती कि इससे पहले उन्होंने फोन काट दिया। मैंने ये बात तुरंत देवर को बताई। जब तक परिवार के लोग खेत पहुंचे, वे दम तोड़ चुके थे। माथे पर बीचोंबीच गोली मारी
अक्षय का शव पूर्वजों की समाधि स्थल से सटा मिला। समाधि से टेक लगाए बैठी अवस्था में मिले। माथे से काफी खून बह चुका था। माथे के बीचोंबीच उन्होंने गोली मारी थी। दाहिने तरह जमीन पर उनकी पिस्टल पड़ी मिली। फोरेंसिक और पुलिस टीम ने मौके से खून के सैंपल, पिस्टल, मोबाइल आदि सबूत जुटाए हैं। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। किसी बात को लेकर डिप्रेशन में चल रहे थे
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में सामने आया कि अक्षय पिछले कुछ समय से किसी बात को लेकर डिप्रेशन में रहा करते थे। सिक्योरिटी एजेंसी चलाते थे, इसलिए खुद भी पिस्टल लेकर चलते थे। पुलिस हर पहलुओं पर जांच कर रही है। मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग और पारिवारिक परिस्थितियों की भी जांच-पड़ताल की जा रही है। ये भी बताया लगाया जा रहा कि इससे पहले अक्षय की किसी से रंजिश तो नहीं थी। कहीं हत्या कर सुसाइड का रूप देने का प्रयास तो नहीं किया गया। ——————- ये खबर भी पढ़िए- आजम खान को घर का कंबल तक नसीब नहीं हुआ:घरवाले रामपुर जेल लेकर पहुंचे, जेलर ने लौटाया आजम खान की जेल में पहली दो रातें बेचैनी भरी रहीं। आजम पूरी रात करवटें बदलते रहे। घर का कंबल भी नसीब नहीं हुआ। घरवाले घर से खाना बनाकर लाए थे, लेकिन जेल प्रशासन ने इसे अंदर ले जाने की इजाजत नहीं दी। कुछ ऐसा ही हाल अब्दुल्ला आजम का भी रहा। पढ़ें पूरी खबर…