लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन बड़ी लाइन से तीन साल की बच्ची रितिका के अपहरण का मामला सामने आया है। बच्ची 4 दिसंबर की रात अपने परिवार के साथ पानी की टंकी के पास सो रही थी। सुबह करीब 3 बजे मां की नींद खुली तो बच्ची गायब थी। हैरानी की बात यह है कि घटना के 48 दिन बाद 21 जनवरी को हुसैनगंज थाने में अपहरण का केस दर्ज हो सका। अपहरण के बाद परिजनों के पास एक अनजान नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने पहले बच्ची के लखनऊ घंटाघर के पास होने की बात कही। जब इसकी सूचना जीआरपी को दी गई तो कॉल करने वाले ने खुद को कानपुर में बताया। परिजनों का आरोप है कि इसके बावजूद जीआरपी ने कोई केस दर्ज नहीं किया और मामले को टाल दिया। 20 दिन कानपुर में भटके परिजन बच्ची के पिता राजेश के मुताबिक, जीआरपी की अनदेखी के बाद वे खुद बच्ची की तलाश में कानपुर पहुंचे। करीब 20 दिन तक वहां खोजबीन की, लेकिन रितिका का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद परिवार वापस जौनपुर लौट गया। डीसीपी को पत्र लिखने के बाद हरकत में आई पुलिस बच्ची की मां वीना ने मामले की शिकायत डाक के जरिए डीसीपी मध्य को भेजी। इसके बाद हुसैनगंज पुलिस हरकत में आई। पुलिस टीम जौनपुर के मछलीशहर थाना क्षेत्र के फुलखा गांव पहुंची और परिजनों को लखनऊ लेकर आई। 21 जनवरी को हुसैनगंज थाने में आखिरकार अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। 2 टीमें बच्ची की तलाश में जुटीं एसीपी हजरतगंज विकास जायसवाल ने बताया- रितिका की तलाश के लिए पुलिस की दो टीमें लगाई गई हैं। कॉल डिटेल्स और संभावित ठिकानों की जांच की जा रही है।