लखनऊ जेल में बंद विचाराधीन बंदी मिथुन कुमार पुत्र चंद्रिका प्रसाद की संदिग्ध मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शनिवार देर रात मिथुन का शव लखनऊ से सीतापुर लाया गया, जिसके बाद रामकोट थाना क्षेत्र के ननसोहा गांव में रविवार देर शाम पुलिस की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार कराया गया। जानकारी के अनुसार मिथुन कुमार को चोरी के एक मामले में 19 दिसंबर को आशियाना थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लखनऊ जेल भेजा था। जेल में बंद रहते हुए उसकी मौत हो गई, जिसकी सूचना मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की पिटाई के चलते मिथुन की मौत हुई है। शनिवार को लखनऊ में परिजनों ने इस आरोप को लेकर हंगामा भी किया था और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। शनिवार देर रात जब शव सीतापुर पहुंचा तो गांव में भारी भीड़ जुट गई। रविवार सुबह परिजन शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार करते हुए लगातार सवाल उठाते रहे। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों से मान-मनौव्वल की। काफी समझाने-बुझाने के बाद शाम परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। एहतियातन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। परिजनों का कहना है कि मिथुन को जब पुलिस ने पकड़ा था, उस समय वह पूरी तरह स्वस्थ था। अचानक जेल में उसकी मौत होना कई सवाल खड़े करता है। परिजनों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं पुलिस का कहना है कि मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर लखनऊ पुलिस आगे की कार्रवाई की जाएगी।