लखनऊ में जनजाति भागीदारी उत्सव का सांस्कृतिक सत्र:बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर कलाकारों ने बिखेरा जादू

लोकनायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजाति गौरव दिवस के अवसर पर ‘जनजाति भागीदारी उत्सव – 2025’ का सांस्कृतिक सत्र लखनऊ में आयोजित हुआ। इस उत्सव ने सभागार को रंगीन लोकधुनों और पारंपरिक नृत्यों से सराबोर कर दिया, जिसमें देशभर के जनजातीय कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। संध्या की शुरुआत चित्रकूट की बूटी बाई और उनके दल के चांगेलिया नृत्य से हुई, जिसने सभागार में ऊर्जा और उत्साह भर दिया। इसके बाद बहराइच की राजकुमारी और उनके दल ने हूरदूंगवा नृत्य प्रस्तुत कर तराई क्षेत्र की सांस्कृतिक छटा को जीवंत किया। पश्चिम बंगाल के अबू सालेह और उनके दल ने रायबेंसे नृत्य के युद्धक और तालबद्ध रूप से दर्शकों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक विरासत को मंच पर उतारा वाराणसी के विनोद कुमार ने अपनी विशेष शैली में गोंडी नृत्य प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश के लाल सिंह मकाम और उनके दल ने बैगा परधौनी प्रदर्शन के माध्यम से जनजातीय समुदाय की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर दर्शाया। उत्तराखंड से आए प्रेम हिंदुआन की पौड़ा नृत्य प्रस्तुति ने पर्वतीय जीवन की आत्मा को जीवंत किया। आज का मुख्य आकर्षण नाटक ‘धरती आबा’ था राजस्थान के सुगना राम और उनके दल ने रावणहत्था वादन से लोकसंगीत का जादू बिखेरा, जबकि पश्चिम बंगाल के अनुत्तम दास और उनके दल का बाउल गायन दर्शकों के हृदय को छू गया।आज का मुख्य आकर्षण नाटक ‘धरती आबा’ था। इस नाटक ने लोकनायक बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और जनजातीय अस्मिता की अमर कहानी को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया, जिससे सभागार में गर्व, प्रेरणा और भावनात्मक संवेदना का संचार हुआ।