KGMU के ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को सस्ते इलाज का झांसा देकर प्राइवेट अस्पताल ले जाने वाले दलाल एक्टिव हैं। इन पर KGMU प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग शिकंजा नहीं कस पा रहा है। ताजा मामले में ट्रॉमा सेंटर से दलाल मरीज को लेकर विभूतिखंड स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गए। सात हजार में इलाज देने के बजाय तीमारदार से 36 हजार रुपए वसूल लिए गए। तीमारदार ने जब मरीज को डिस्चार्ज की बात कही तो डॉक्टर और स्टाफ भड़क उठे। मरीज तीमारदार को 12 घंटे तक बंधक बना लिया। पीड़ित ने डायल-112 पर फोन किया तो पुलिस की मदद से अस्पताल संचालक से छुटकारा मिला। पीड़ित बेटे ने सीएमओ से लिखित शिकायत की है। ट्रॉमा में बेड न होने की बात कही, तुरंत आ गई दलाल की कॉल बलरामपुर के खैरा निवासी सुनील पाल के मुताबिक, पिता राम भिलाव की तबीयत 26 दिसंबर को बिगड़ गई थी। वह पिता को बलरामपुर के जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से 27 को डॉक्टरों ने KGMU रेफर कर दिया। वह पिता को उसी दिन लेकर KGMU ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। ट्रॉमा में डॉक्टर ने बेड न खाली होने की बात कही। कुछ ही देर में सुनील के मोबाइल पर कॉल आई। दूसरी ओर से बोलने वाले व्यक्ति ने कहा कि वह मरीज का इलाज निजी अस्पताल में सस्ते में करा देगा। बातचीत के कुछ ही देर में ट्रॉमा सेंटर के गेट पर एक एम्बुलेंस पहुंची। उसमें बैठे व्यक्ति ने सुनील से कहा कि 24 घंटे में सात हजार रुपए के हिसाब से इलाज होगा। इससे अधिक रुपए नहीं लगेंगे। 12 घंटे बंधक बनाया, जेब की तलाशी तक ली वह दलालों के झांसे में आकर मरीज को लेकर विभूति खंड स्थित निजी अस्पताल पहुंचे। जांच के बाद बहुत जल्द आएगी रिपोर्ट मरीज को भर्ती करने के कुछ घंटे बाद सुनील से 36 हजार रुपए ले लिए गए। मरीज की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में सुनील ने मरीज की छुट्टी करने की बात कहीं। सुनील का आरोप है कि छुट्टी की बात सुनते ही अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ भड़क गए। उन्हें और मरीज को करीब 12 घंटे बंधक बना लिया। सोमवार को जेब की तलाशी ली गई। सुनील ने पुलिस कंट्रोल 112 पर शिकायत की तो पुलिस पहुंची। पुलिस ने अस्पताल से मरीज, तीमारदार को छुड़वाया। सुनील मरीज पिता को लेकर दूसरे अस्पताल चले गए। सुनील ने मामले की शिकायत सीएमओ से मंगलवार को लिखित रूप से की है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई जाएगी।