लखनऊ में रक्षामंत्री राजनाथ ने हाथ जोड़े:बोले- UN में सुधार की जरूरत, CM योगी ने कहा- दूसरों के लिए संकट खड़ा करना गलत

लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल में विश्व के मुख्य न्यायाधीशों का 26वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन चल रहा है। शुक्रवार सुबह सीएम योगी ने इसका औपचारिक शुभारंभ किया। इसके बाद शाम को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि कई देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे है। UN में समय के अनुसार बदलावों पर जोर देते हुए कहा- आज का भारत 75-80 साल पुराने भारत से बहुत अलग है। राजनाथ सिंह ने कहा- कई देश अपने कानून बनाकर दुनिया पर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं। यह समय यूनाइटेड नेशंस की बुराई करने का नहीं, बल्कि उसे मजबूत करने का है। हमारा मानना है कि UN में सुधार करके दुनिया को एक बेहतर जगह बनाया जा सकता है। UN में रिप्रेजेंटेशन बैलेंस्ड होना चाहिए। फैसले बिना किसी भेदभाव के होने चाहिए। पावर-शेयरिंग सच्ची होनी चाहिए। तभी यह संस्था एक बार फिर अपना असली मकसद पूरा कर सकती है। आज, जब हमारे सामने एक टूटी-फूटी दुनिया है, जहां कई झगड़े साथ-साथ हो रहे हैं, तो यह और भी साफ हो जाता है कि दुनिया को भारत के सिविलाइजेशन नजरिए से बहुत कुछ सीखना है। योगी आदित्यनाथ ने कहा- दुनियाभर में डेटा चोरी की समस्या खड़ी हो रही है। वैश्विक जलवायु, साइबर सिक्योरिटी और आतंकवाद जैसी समस्या पर हम सभी को मुखर होना होगा। कार्यक्रम की 3 तस्वीरें देखिए… राजनाथ सिंह ने कहा- दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध संघर्ष चल रहा है। इसराइल-हमास संघर्ष, यूक्रेन-रूस युद्ध और सूडान-अफ्रीका के कई क्षेत्रों में संघर्ष जारी है। इन सबके बीच UN की भूमिका और सक्रिय रूप से देखने को मिल सकती थी। हालांकि, इसमें UN की इच्छा में कोई कमी नहीं दिखाई देती है। बस ग्लोबल पॉलिटिक्स की जटिलता बड़े देशों का प्रभाव और इंस्टीट्यूशनल पॉलिटिक्स की गतिशीलता का असर दिखता है। जिसने UN की ऑथोरिटी को प्रश्नों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।और ये स्थिति तभी बदल सकती है जब UN पीस, जस्टिस और इक्वल रिप्रजेंटेशन के सिद्धांत पर काम करे। ये मेरा मानना है कि आज की नई दुनिया को नए यूनाइटेड नेशन की आवश्यकता है। नए यूनाइटेड नेशन से मेरा आशय किसी नए संस्थान की निर्माण से नहीं है। बल्कि इसका अर्थ है कि इस संस्था को नई ऊर्जा, नई कार्यशैली और नई दृष्टिकोण के साथ पुनर्जीवित की जाए। शांति और न्याय एक पहलू के दो सिक्के राजनाथ सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल सत्य हैं। जहां सम्मान है, वहीं शांति, जहां सम्मान, वहीं विश्वास जन्म लेता है। भारत की परिस्थिति, नींव, व्यवहार दुनिया को बताते हैं कि शांति और न्याय अलग-अलग नहीं है। दोनों एक दूसरे के पहलू हैं। न्याय के लिये शांति जरूरी है और शांति के बगैर न्याय संभव नहीं है। संकट के समय भारत सबसे पहले पहुंचा जब भी दुनिया में संकट आया, भारत का प्रयास रहा है कि सबसे पहले पहुंचे। अफगानिस्तान में फंसे लोगों को निकालना, नेपाल भूकंप राहत, श्रीलंका या अफ्रीका में, भारत मानवता की रक्षा के लिए हमेशा खड़ा रहा है। हमारी सेना, हमारा प्रशासन सबने यह प्रमाणित किया है कि भारत अपनी जिम्मेदारी को समझता है और निर्वाह करता है। शांति न्याय, समानता, मानवता का सम्मान करता है। उसी आचरण में जीता भी है। यह भारत की परंपरा व चिंतन में रचा बसा है। यह सदियों से रहा है। लखनऊ में बच्चों को गढ़ा जा रहा है सीएमएस में आयोजित 26 वें अन्तरराष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ में सीएमएस समेत कई संस्थान ऐसे संस्थान हैं, जहां बच्चों को गढ़ा जा रहा है। पढ़ाई के साथ इन्हें संस्कार दिये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीएमएस से हमारी भावनात्मक स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। सीएमएस के संस्थापक स्व. जगदीश गांधी से मेरा पुराना गहरा नाता रहा है। रक्षामंत्री ने स्व. गांधी को श्रद्धांजलि दी और स्मृति को नमन किया। विचार अपने समय के उत्पाद स्कूल या कोई संस्थान के विचार उस समय के उत्पाद होते हैं। यह विचार तत्कालिक स्थिति के अनुरूप होते हैं। यह परिस्थितियां सोशल, रानजीतिक परिस्थिति के हिसाब से बनाई जाती हैं। संयुक्त राष्ट्र को भी इसका ध्यान रखने की जरूरत है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसकी जरूरत पड़ी। दूसरे विश्वयुद्ध के समय तक पूरी दुनिया में कुछ चुनिंदा देशों का अधिपत्य रहा है। एक ओर दुनिया विश्व युद्ध झेल रही थी तो दूसरी ओर नए देशों का जन्म हो रहा था। दुनिया ने इसे समझा और संयुक्त राष्ट्र का जन्म हुआ। जब परिस्थितियां बदलती है तो उनमें बदलाव जरूरी हो जाता है। हम संसार को परिवार मानते हैं। यह संदेश भारत से दुनिया को गया है। भारत में दायित्व की परंपरा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है। हमारे यहां मानव के साथ अन्य जीवों की सुरक्षा व सम्मान सदियों से रही है। भारत ने हमेशा शांति के लिये अग्रणी भूमिका निभायी रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया का व्यवहार हमेशा संतुलित नहीं रहा है। जिन देशों पर वैश्विक संस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी है। वही निर्णय व संरचानाओं को संकुचित करते हैं। कोई इंसान किसी पेड की टहनी, फूल व पत्तियों को हटा दे। केवल तना रहे, तो यह उम्मीद न रखे कि वह फल देगा। यह संभव नही है। आज यूएन के साथ ऐसी स्थिति दिखाई देती है। कुछ प्रक्रियाओं को अपने हित में रोक लिए जाते हैं। शांति सुरक्षा के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं होते। कई बार अनुदान पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। जब संसाधन नहीं रहते तो स्वाभाविक रूप से उसका प्रभाव कम होता है। फिर भी उससे उम्मीद की जाती है कि विश्व संकट को रोके। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी यूएन को कमजोर करने का प्रयास नहीं किया। शांति की क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है। हमारे करीब तीन लाख सैनिकों ने दुनिया में शांति स्थापना के लिए काम किया है। बहुत सारे सैनिकों ने बलिदान दिया है। भारत ने हमेशा अन्तरराष्ट्रीय कानून का सम्मान किया है। विश्व के किसी भी हिस्से में संकट आया, भारत अपने पूरे मन धन से खड़ा मिला। भारत की नीति स्पष्ट है, न्याय केवल नियम नहीं धर्म है। शांति केवल नीति नहीं यह भारत की परंपरा है। वैश्विक सद्भाव डिप्लोमेसी नहीं भारत की संस्कृति है। आज हम ऐसी दुनिया में हैं, जहां संघर्ष बढ़ रहे है। नई तकनीक ने युद्ध और शांति की परिभाषा को बदल दिया है। हर सेक्टर में चुनौतियां हमारे सामने हैं। जियो पॉलिटकल और इकोनामिक ने ज्यादा संकट पैदा किया है। जलवायु परिवर्तन जैसी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। इससे पहले शुक्रवार सुबह सीएम योगी ने कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस दौरान सीएम योगी ने कहा- एक-दूसरे से डायलॉग न होना दुनिया की वास्तविक समस्या है। यह सम्मेलन डायलॉग का माध्यम बनेगा। 80 साल पहले UN की स्थापना के समय की घोषणा की सार्थकता आज भी है। आज हमें उन पुरानी बातों तक सीमित न रहकर आज के ज्वलंत समस्याओं, जिनमें साइबर सुरक्षा, पर्यावरण रक्षा और वैश्विक आतंकवाद पर भी फोकस करने की जरूरत है। एक पुरानी कहावत है कि यदि आज दूसरे के घर में आग लगी है और आप निश्चिंत होकर सो रहे हैं, तो अगले दिन वह आग आपके घर में भी लग सकती है। जो आज दूसरों के लिए संकट खड़ा कर रहा है, कल वह खुद उसी में घिर सकता है। कोविड जैसी महामारी इसका परिचायक है। पल-पल के 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