लखनऊ में वीर शिवाजी महाराज का जन्मोत्सव मनाया:भातखंडे विश्वविद्यालय में मराठी समाज की धूम, पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री भी पहुंचे

सीमित साधनों के दौर में शिवाजी महाराज ने जिस तरह प्राकृतिक संसाधनों के सहारे एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक तालमेल बनाए रखा, वह अद्भुत था। शिवाजी हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते थे। आज जरूरत है कि हम उनके जीवन मूल्यों को अपने जीवन में उतारें। अनुशासन, सामंजस्य और सुशासन उनकी पहचान थी। अगर हम राष्ट्रहित में कार्य करेंगे तो समाज और आने वाली पीढ़ियां स्वतः सशक्त होंगी। यह बात इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने मुख्य अतिथि के तौर पर हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्मोत्सव समारोह में कही। कार्यक्रम का आयोजन भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर स्थित कलामंडलम हॉल में मराठी समाज उत्तर प्रदेश की ओर से किया गया। पूरे आयोजन में अनुशासन, उत्साह और राष्ट्रभक्ति की झलक देखने को मिली।समारोह में ‘जय शिवाजी, जय भवानी’ के नारे लगे। ‘भारतीयों को आंख में आंख डाल बात करने का साहस दिया’ पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री डॉ. अम्मार रिजवी ने कहा कि शिवाजी महाराज ने भारतीयों को सिर ऊंचा कर और आंख में आंख डालकर बात करने का साहस दिया। उन्होंने ‘रूलर्स ऑफ इंडिया’ में जन्मतिथि 1627 और अन्य स्थानों पर 1630 का उल्लेख होने की चर्चा की, लेकिन 1680 में उनके स्वर्गवास तक उन्होंने जिस बड़े साम्राज्य को चुनौती दी, वह असाधारण था। उन्होंने एक शेर पढ़ते हुए कहा कि हजारों साल में एक शिवाजी जन्म लेते हैं और भारतवर्ष उनका ऋणी है। हिंदवी समाज की स्थापना करना ऐतिहासिक कार्य था डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने ‘जय शिवाजी, जय भवानी’ के उद्घोष के साथ कहा कि शिवाजी का नाम लेते ही ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीकृत सत्ता और अत्याचार के दौर में हिंदवी समाज की स्थापना करना ऐतिहासिक कार्य था। पारदर्शी प्रशासन, सुरक्षा पर जोर, नारी सम्मान और सभी धर्मों के प्रति आदर—ये उनके शासन के उच्च मानदंड थे, जिन्हें आज भी अपनाने की जरूरत है।