लखनऊ में नाट्य संस्था आकांक्षा थियेटर आर्ट्स ने उ.प्र उर्दू अकादमी के सहयोग से हास्य नाटक ‘आदाब अर्ज है’ का सफल मंचन किया। यह प्रस्तुति गोमती नगर स्थित अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सभागार में आयोजित की गई, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। नाटक का निर्देशन तुषार बाजपेयी ‘शुभम’ ने किया था। इस नाटक के लिए 60 दिवसीय कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ रंग निर्देशक और उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी अवार्डी प्रभात कुमार बोस के मार्गदर्शन में हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राघवेन्द्र कुमार ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। विशिष्ट अतिथि पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए रंगमंच की परंपरा को मजबूत बनाने की बात कही। कहानी एक मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है यह नाटक मौलियर की मूल रचना पर आधारित है, जिसका सलीम आरिफ ने अनुवाद किया है। इसकी कहानी एक मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। कथानक की शुरुआत जुम्मन और उसकी पत्नी जुबैदा के बीच नोकझोंक से होती है, जो बाद में झगड़े में बदल जाती है।पति से परेशान जुबैदा बदला लेने की योजना बनाती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात गुलमेख मोहम्मद के नौकरों हिकमत उल्ला और फरखत उल्ला से होती है, जो अपने मालिक की गूंगी बेटी के इलाज के लिए डॉक्टर की तलाश में होते हैं। जुबैदा चालाकी से जुम्मन को डॉक्टर बताकर नौकरों से उसकी पिटाई करवा देती है। जुम्मन मजबूरन खुद को डॉक्टर मान लेता है और इलाज के लिए गुलमेख मोहम्मद के घर पहुँचता है।वहाँ पता चलता है कि बेटी शमीम आरा जानबूझकर गूंगी बनी है, क्योंकि वह अपनी मर्जी के खिलाफ शादी नहीं करना चाहती। जुम्मन की मदद से शमीम आरा अपने प्रेमी आशिक अली से मिलती है, और इसके बाद कहानी में कई हास्य मोड़ आते हैं। इन कलाकारों ने हिस्सा लिया अंततः, गुलमेख मोहम्मद अपनी बेटी का निकाह आशिक अली से कराने की घोषणा करते हैं और जुम्मन को माफ कर देते हैं। इसी सुखद मोड़ पर नाटक का समापन होता है।नाटक में मुख्य भूमिकाओं में तुषार बाजपेयी, मुस्कान सोनी, योगेश शुक्ला, अंकुर सक्सेना और विकास दूबे ने प्रभावशाली अभिनय किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।