SGPGI के डॉक्टरों ने 140 किलोग्राम से अधिक वजन की महिला के कूल्हे (फीमर नेक) का जटिल ऑपरेशन कर नया जीवन देने में कामयाबी हासिल की है। 50 साल की महिला का कूल्हा फैक्चर हो गया था। उन्हें मोटापे के साथ थायराइड, उच्च रक्तचाप और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया जैसी गंभीर बीमारियां थीं। वह सांस लेने के लिए सीपैप मशीन पर निर्भर थीं। अधिक वजन और उच्च जोखिम के कारण कई अस्पतालों ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया था। कानपुर निवासी इफपत बानो को परिवारीजनों ने कई डॉक्टरों को दिखाया था। कई बीमारियों से जूझ रही थी महिला डॉक्टरों ने ऑपरेशन की जरूरत बताई, लेकिन मोटापा और दूसरी बीमारी को देखने के बाद ऑपरेशन करने से मनाकर दिया। परिवारीजन दिसंबर में मरीज को लेकर पीजीआई हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में पहुंचे। यहां डॉ. कुमार केशव ने मरीज को देखा। जरूरी जांच कराईं। मरीज की तबीयत का आकलन किया। उसके बाद ऑपरेशन करने का फैसला किया। फैट के कारण फ्रैक्चर तक पहुंचना कठिन था। डॉ. कुमार केशव ने बताया कि मरीज के अत्यधिक फैट के कारण फ्रैक्चर तक पहुंचना कठिन था। रक्तस्राव को रोकना भी बड़ी चुनौती थी। डॉ. केशव ने बताया कि आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन की मदद से 150 मिमी लंबी विशेष सुई का उपयोग कर स्पाइनल एनेस्थीसिया दिया। 20 से 30 मिनट में ऑपरेशन पूरा करना था। ऑपरेशन की रणनीति बनाई और तय समय में ही ऑपरेशन खत्म किया गया। फैक्चर को जोड़ने के लिए विशेष इम्प्लांट का इस्तेमाल किया गया। मांसपेशियां टूटने की बीमारी पर किया वार डॉ. केशव ने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज को रैबडोमायोलिसिस (मांसपेशियों का टूटना) जैसी गंभीर जटिलता हुई। उस वक्त मरीज एनस्थीसिया आईसीयू में थीं। डॉ. सुरुचि ने लक्षण को पहचाना। जरूरी जांच कराईं। डॉ. सुरुचि ने कहा कि यदि समय पर मांसपेशियों के टूटने संबंधी बीमारी का इलाज शुरू न करते तो गुर्दे खराब होने का खतरा बढ़ गया था। लेकिन समुचित इलाज से बीमारी को रोकने में सफलता मिली। अब मरीज के टांके कट चुके हैं। वह वॉकर के सहारे चलने में सक्षम है। इन्होंने किया ऑपरेशन डॉ. कुमार केशव का मोटापे से ग्रस्त मरीजों की पेल्विक सर्जरी पर शोध ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में भी प्रकाशित हो चुका है। टीम में डॉ. कुमार केशव के अलावा डॉ. उत्कर्ष, डॉ. अर्पण, डॉ. राजेश, डॉ. योगेश, स्क्रब नर्स अंकित, एनस्थीसिया विभाग के डॉ. वंश प्रिय, डॉ. रुमित और डॉ. निकिता रहीं।