लखनऊ विश्वविद्यालय FMS का अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न:अशोका विश्वविद्यालय संग ‘मानव व्यवहार’ पर गहन चर्चा

लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रबंधन अध्ययन संकाय (FMS) ने अशोका विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सोशल एंड बिहेवियर चेंज (CSBC) के सहयोग से आयोजित अपने प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन का सफलतापूर्वक समापन किया। इस सम्मेलन का विषय ‘कार्यस्थल और समाज में मानव व्यवहार: सिद्धांत, व्यवहार और नीति को जोड़ने के लिए एक बहु-विषयक दृष्टिकोण’ था। दिन की शुरुआत तीन प्रतिष्ठित वक्ताओं के ज्ञानवर्धक पूर्ण सत्र से हुई। शूलिनी विश्वविद्यालय के योआनंदा स्कूल ऑफ़ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस के निदेशक प्रो. सामदू छेत्री ने मानव समृद्धि, सचेतनता और आंतरिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्तमान क्षण में सचेत जागरूकता, आत्म-अभिकथन और संतुलित जीवन के महत्व को रेखांकित करते हुए पांच तत्वों के संरेखण से आत्म-जागरूकता और स्वस्थ संबंधों के निर्माण पर जोर दिया। नीति प्रोत्साहन पर चर्चा की आईएएस शीतल वर्मा ने बहु-हितधारक वातावरण में नीति प्रोत्साहन (Policy Nudge) पर चर्चा की। उन्होंने उत्तर प्रदेश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली के सुधार का उदाहरण प्रस्तुत किया और बताया कि व्यवहारिक प्रोत्साहन, सहानुभूति, डेटा और हितधारक संरेखण के साथ डिज़ाइन किए जाने पर जटिल प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं। आई.आई.टी दिल्ली के प्रो. विग्नेश्वरा इलावरसन ने अंतर-विषयक अनुसंधान की रणनीतियों और इसके लिए सैद्धांतिक व व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को सिद्धांत और अभ्यास की भाषाओं का संतुलन करना चाहिए। सार्वजनिक नीति पर शोध पत्र प्रस्तुत किए पूर्ण सत्र के बाद, सम्मेलन समानांतर तकनीकी सत्रों में विभाजित हुआ। इन सत्रों में प्रबंधन, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र के विद्वानों ने उभरती व्यवहारिक अंतर्दृष्टि, कार्यस्थल की गतिशीलता, नेतृत्व, टीम प्रदर्शन और सार्वजनिक नीति पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। विशिष्ट वक्ता सत्र में प्रो. संजीत धामी और प्रो. अरविंद मोहन ने भावनाओं, सामाजिक मानदंडों और टीम प्रदर्शन पर व्यावहारिक अंतर्दृष्टि साझा की। समापन समारोह में कुलपति डॉ. मनुका खन्ना ने सहयोगात्मक अकादमिक आदान-प्रदान की प्रशंसा की, जबकि डीन प्रो. संगीता साहू और डॉ. शेरोन बर्नहार्ड्ट ने प्रतिभागियों और आयोजन टीमों के प्रयासों को सराहा।