लखनऊ हाईकोर्ट ने देवी-देवताओं के अपमान पर याचिका निस्तारित की:कहा-केंद्र-राज्य सरकार के समक्ष अपनी बात रखने को स्वतंत्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक पुस्तकों के अपमान की घटनाओं को रोकने की मांग वाली एक जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता से कहा- वह इस संबंध में केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र है। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि इस संबंध में पहले से कानून मौजूद हैं। हालांकि, यदि याचिकाकर्ता को लगता है कि ये कानून ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं, तो वे संबंधित सरकारों से संपर्क कर सकते हैं। दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद पारित यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद पारित की। याचिकाकर्ता की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने न्यायालय को बताया कि हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक पुस्तकों के अपमान की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। अधिवक्ता अग्निहोत्री ने तर्क दिया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई कड़ा कानून नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ कानून मौजूद हैं, लेकिन वे इन घटनाओं पर प्रभावी ढंग से रोक लगाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। किसी विशेष घटना का उल्लेख नहीं किया सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने पाया कि याचिका में किसी विशेष घटना का उल्लेख नहीं किया गया था। इसके बजाय, इसमें कई घटनाओं को उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करते हुए सरकारों से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का अनुरोध किया गया था। पूरी बात सुनने के बाद, न्यायालय ने याचिकाकर्ता को केंद्र या राज्य सरकार के सामने अपनी चिंताओं को रखने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र बताया।