लखनऊ के खाने से लेकर तहजीब तक को नई पहचान मिली है। हैदराबाद के बाद लखनऊ दूसरा शहर बन गया है, जिसे यूनेस्को ने क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी घोषित किया। पीएम मोदी और सीएम योगी ने भी इस पर खुशी जाहिर की है। पीएम मोदी ने लिखा- मैं दुनियाभर के लोगों से अपील करता हूं कि वे लखनऊ आएं। शहर की अनोखी पहचान को जानें। रक्षामंत्री राजनाथ ने लिखा- यह उत्तर प्रदेश, भारत और हर लखनवी के लिए गर्व का क्षण है। यूपी के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया- पर्यटन विभाग ने लखनऊ के लिए नामांकन 31 जनवरी, 2025 को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को भेजा था। भारत सरकार ने 3 मार्च को यूनेस्को को अंतिम डॉसियर पेश किया। 31 अक्टूबर को कॉन्फ्रेंस में लखनऊ को औपचारिक रूप से ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ नेटवर्क में शामिल किया गया। यूनेस्को ने यह घोषणा उज्बेकिस्तान के समरकंद में अपनी 43वीं जनरल कॉन्फ्रेंस में ‘वर्ल्ड सिटीज डे’ पर की। यह सम्मान उस शहर को मिलता है, जो अपने खानपान, कल्चर और इनोवेशन से दुनिया को मोटिवेट करता है। 8 शहरों के नेटवर्क में मिला स्थान
प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात ने बताया- यूनेस्को की इस सूची में अब दुनियाभर के 70 शहर शामिल हैं। लखनऊ की यह उपलब्धि उसके समृद्ध खानपान और कल्चर की है। इस साल दुनिया के 8 नए शहरों को इस नेटवर्क में स्थान मिला है। पीएम मोदी ने कहा- लखनऊ में समृद्ध खान-पान की परंपरा
लखनऊ की उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया। लिखा- लखनऊ अपनी जीवंत संस्कृति के लिए जाना जाता है। इसके केंद्र में समृद्ध खान-पान परंपरा है। मुझे खुशी है कि यूनेस्को ने इस पहलू को मान्यता दी। लखनऊ की यह मान्यता न सिर्फ उसकी पाक-संस्कृति का सम्मान है, बल्कि भारत की विविधता और सांस्कृतिक विरासत की भी झलक है। रक्षामंत्री राजनाथ बोले- हर लखनवी के लिए गर्व का क्षण
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया- लखनऊ को यूनेस्को की क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी के रूप में चुने जाने की खबर जानकर बेहद खुशी हुई। यह वैश्विक मान्यता लखनऊ की सदियों पुरानी पाक-कला की उत्कृष्टता, उसकी अनोखी तहजीब, परंपरा और स्वाद को सम्मान देती है। अवधी बिरयानी की कला से लेकर गलौटी कबाब की नफासत तक और मक्खन मलाई की मिठास से लेकर हर व्यंजन के स्वाद तक, लखनऊ का हर जायका हमारी विरासत और सौहार्द्र की कहानी कहता है। यह उत्तर प्रदेश, भारत और हर लखनवी के लिए गर्व का क्षण है। बिरयानी से लेकर टुंडे कबाब तक, स्वाद ही स्वाद
लखनऊ की पाक परंपरा केवल स्वाद तक सीमित नहीं, बल्कि यह उसकी तहजीब और इतिहास का हिस्सा है। यहां की तकनीक, टुंडे कबाब, गलौटी कबाब, लखनऊ बिरयानी, निहारी, शीरमाल, और कुल्फी-फालूदा जैसी डिशें दुनियाभर में मशहूर हैं। शहर की गलियों में बसी यह खान-पान संस्कृति ‘शाही रसोई’ और ‘स्ट्रीट फूड’ दोनों का सुंदर मेल है, जो इसे अनोखा बनाती हैं। तस्वीरें देखिए… लखनऊ का खास जायका… टूरिज्म और लोकल बिजनेस को मिलेगा बढ़ावा टूरिज्म के विशेषज्ञों का मानना है कि यूनेस्को की यह पहचान लखनऊ के फूड टूरिज्म को नई ऊंचाई देगी। खान-पान से जुड़े स्थानीय व्यवसायों, पारंपरिक बावर्चियों और छोटे उद्यमों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। इससे स्थानीय रोजगार बढ़ेगा और शहर की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति अमृत अभिजात ने बताया- साल 2024 में लखनऊ में 82.74 लाख पर्यटक आए, जबकि 2025 के पहले छह महीनों में ही 70.20 लाख पर्यटक पहुंच चुके हैं। यह रुझान बताता है कि खान-पान और संस्कृति, उत्तर प्रदेश में पर्यटन वृद्धि के प्रमुख आधार बन चुके हैं। ……………………………… संबंधित खबर पढ़िए लखनऊ के जायके का मुरीद हुआ यूनेस्को…VIDEO, टुंडे कबाब, इदरीस बिरयानी और कुल्चे-निहारी लोगों की पहली पसंद लखनऊ को यूनेस्को की प्रतिष्ठित ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ में नॉमिनेट किया गया है। इससे अवधी पाक कला को दुनियाभर में विशेष पहचान मिली है। इस उपलब्धि से शहर नामचीन दुकानदारों में खुशी का माहौल है। यहां पढ़ें पूरी खबर