लिंक रोड के सामने एक किलोमीटर तक लग रहा जाम:रान्ग साइड से वाहन आकर बिगाड़ रहे व्यवस्था, ट्रैफिक पुलिसकर्मी भी व्यवस्था बनाने में नाकाम

मेरठ में रेलवे रोड-बागपत रोड लिंक रोड पर जैसे जैसे वाहनों का दबाव बढ़ रहा है, वैसे वैसे कुछ समस्याएं सिर उठाती दिख रही हैं। इन दिनों सबसे बड़ी समस्या जाम की सामने आ रही है, जिसका समाधान ढूंढ पाने में फिलहाल ट्रैफिक पुलिस नाकाम है। ऐसा तब है कि जब सामने ही थाना भी है। पहले एक नजर लिंक रोड पर
बागपत रोड से रेलवे रोड की दूरी को कम करने के लिए लिंक रोड की मांग सालों से उठ रही थी। इसको लेकर जनआंदोलन हुए, तब जाकर लिंक रोड के लिए रास्ता तैयार हो पाया। पिछले पांच महीने से लिंक रोड पर काम चल रहा है जो अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस लिंक रोड के बनने के बाद 40 मिनट का रास्ता चार से पांच मिनट में पूरा हो रहा है। अभी से जाम बनने लगा मुसीबत
लिंक रोड के दोनों ही छोर पर अच्छा खासा ट्रैफिक है। अब जब इस पर वाहनों का दबाव बढ़ने लगा है तो यही ट्रैफिक जाम का रूप लेने लगा है। सबसे ज्यादा दिक्कत बागपत रोड वाले छोर पर है। यहां तीन तरफ का ट्रैफिक रोककर एक तरफ का ट्रैफिक चलाना पड़ रहा है। नतीजा यह है कि बागपत रोड से फुटबॉल चौक की तरफ आने जाने वाले वाहनों की लंबी लंबी कतार लग रही हैं। रॉन्ग साइड से घुस रहे वाहन
लिंक रोड की व्यवस्था को रॉन्ग साइड वाहन बिगाड़ रहे हैं। दरअसल, यहां लिंक रोड के छोर पर विद्युत पोल खड़ा है। यह पोल डिवाइडर का काम भी कर रहा है लेकिन सामने से आने वाले वाहन चालकों को अंदाजा ही नहीं हो पा रहा कि किस तरफ से लिंक रोड पर प्रवेश करना है। वह रॉन्ग साइड घुस जाते हैं। इसके बाद खामियाजा जाम के रूप में भुगतना पड़ता है। रास्ता चौड़ा हो तो बने बात
लिंक रोड के सामने लगने वाले जाम की कई वजह हैं। यहां हाईटेंशन लाइन का पोल एकदम लिंक रोड के सामने खड़ा है। सामने ही डिवाइडर है। ऐसे में ट्रांसपोर्टनगर से जिस वाहन को लिंक रोड पर आना है, वह रॉन्ग साइड से प्रवेश करने का प्रयास करता है और जाम लग जाता है। इसके बाद ट्रैफिक पुलिसकर्मी वाहनों को रुकवाकर रॉन्ग साइड वाहन को निकालने में जुट जाता है। तब तक तीनों तरफ वाहनों की लंबी लंबी कतार लग जाती है। लिंक रोड पर मनमानी शुरु
लिंक रोड के निर्माण के साथ ही इस रूट पर मनमानी भी शुरु हो गई है, जिससे लोग परेशान हैं। यहां लोगों के घरों की दीवारों पर विज्ञापन पोस्टर चस्पा होने लगे हैं। कई जगह तो पेंट का प्रयोग किया गया है। लिंक रोड को पूरा करने में हो रही देरी का ही नतीजा कहेंगे कि जिन दीवारों पर मेरठ की क्रांति गाथा लिखी जानीं थी, वहां भी पोस्टर चस्पा होने शुरु हो गए हैं और कोई देखने वाला नहीं है।