संभल हिंसा: HC ने आलम को अंतरिम अग्रिम जमानत दी:ASP अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों पर FIR का हुआ था आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल हिंसा के अभियुक्त आलम को बड़ी राहत देते हुए अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह आदेश पारित करते हुए आलम को 25 फरवरी 2026 तक गिरफ्तारी से संरक्षण दिया है और इस मामले में राज्य सरकार से हलफनामा भी तलब किया है। गौरतलब है कि आलम वही व्यक्ति है, जिसकी ओर से एएसपी अनुज चौधरी सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश न्यायालय से प्राप्त किया गया था। हिंसा और गोली लगने का मामला यह पूरा मामला संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी में स्थित विवादित धार्मिक स्थल (श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद) के सर्वे से जुड़ा है। 24 नवंबर 2024 को दूसरे चरण के सर्वे के दौरान क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी। इसी दौरान नई सराय खग्गू सराय निवासी आलम पुत्र यासीन को गोली लगी थी। इसके बाद आलम ने मेरठ के एक निजी अस्पताल में इलाज कराया था। पुलिसकर्मियों पर एफआईआर का आदेश फरवरी 2025 में आलम के पिता ने चंदौसी की सीजेएम कोर्ट में याचिका दायर की थी।9 जनवरी 2026 को तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर ने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट में सुनवाई मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर आलम की ओर से अधिवक्ता प्रभात श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आलम निर्दोष है। शुरुआती एफआईआर में उसका नाम नहीं था। उसे जानबूझकर नामजद किया गया। गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है। कोर्ट ने इन दलीलों को सुनने के बाद आलम को अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान की। आलम पर लगे आरोप आलम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं में धारा 191(3): घातक हथियार से दंगा, धारा 100(1): हत्या का प्रयास, धारा 121: सरकारी कर्मचारी को कर्तव्य से रोकने हेतु चोट, धारा 132: सरकारी कर्मचारी पर हमला का मुकदमा दर्ज है। न्यायिक प्रशासन में बदलाव 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर का आदेश देने वाले तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला सुल्तानपुर कर दिया गया था। उनके बाद दीपक कुमार जायसवाल और फिर आदित्य कुमार सिंह को सीजेएम नियुक्त किया गया, जिनकी नियुक्ति को लेकर अधिवक्ताओं द्वारा विरोध भी दर्ज कराया गया था। 19 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद को श्री हरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में दाखिल किया गया था। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन पहले चरण और 24 नवंबर को दूसरे चरण का सर्वे हुआ। इस दौरान हिंसा भड़क गई, जिसमें पांच लोगों की मौत, 29 पुलिसकर्मियों के घायल होने और 12 एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि हुई।अब तक 134 अभियुक्तों को जेल भेजा जा चुका है, जिनमें जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट, तीन महिलाएं और फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन सहयोगी भी शामिल हैं।