श्रीराम मूर्ति स्मारक (SRMS) कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के श्रीराम मूर्ति शतिक सभागार में रविवार को स्वर्गीय श्रीराम मूर्ति की 116वीं जन्म तिथि पर 25वां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाॅ.एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विवि के कुलपति प्रोफेसर (डा.) जय प्रकाश पाण्डेय ने 305 छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान कीं। डाॅ. पाण्डेय ने विद्यार्थियों को अपना विजन और मिशन खुद बनाने की सलाह देते हुए कहा कि उत्साह के साथ जब प्रतिबद्धता दोगुनी होती है, तब सफलता मिलने का मौका चार गुना बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए सर्विस सेक्टर से आगे बढ़कर स्टार्टअप और इनोवेशन की सीढ़ी चढ़नी होगी। स्किल यूनिवर्सिटी और इंडस्ट्रियल पार्क का होगा निर्माण
एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति ने मेधावियों को भविष्य की राह दिखाते हुए विमको फैक्ट्री के कायाकल्प की योजना साझा की। उन्होंने बताया कि वहां आठ फैकल्टी वाली स्किल यूनिवर्सिटी के साथ 150 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल और मेडिकल ट्रामा सेंटर बनाया जाएगा। युवाओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि यहां बनने वाले इंडस्ट्रियल पार्क में एसआरएमएस के विद्यार्थी अपना स्टार्टअप शुरू कर सकेंगे, जिसका पूरा ‘फाइनेंशियल रिस्क’ ट्रस्ट उठाएगा। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के ‘उठो, जागो’ के आह्वान के साथ छात्रों में नई ऊर्जा भरी। श्रीराम मूर्ति स्मारक (SRMS) कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में हुए 25वां दीक्षांत समारोह की फोटो हर्ष और उत्कर्ष को श्रीराम मूर्ति गोल्ड मेडल, 51 हजार का मिला नकद पुरस्कार
समारोह के दौरान शैक्षणिक सत्र 2024-2025 में बीटेक, एमबीए, एमसीए, बीफार्मा और लॉ में उत्तीर्ण मेधावियों का सम्मान हुआ। सीईटी के हर्ष सक्सेना और सीईटीआर के उत्कर्ष जायसवाल को संस्थान के सर्वोच्च सम्मान ‘श्रीराम मूर्ति गोल्ड मैडल’ के साथ 51,000 रुपये का चेक प्रदान किया गया। पूजा काराकोटी, निजारिश उमर, अमूल्य शर्मा और राज कुशवाहा को गोल्ड मेडल संग 21,000 रुपये दिए गए। खेल के क्षेत्र में देवेश गंगवार और सौरभ सिंह को विशेष पुरस्कार से नवाजा गया। इसके साथ ही ट्रस्ट ने संस्थान के 14 मेधावी छात्र-छात्राओं का पूरा शैक्षणिक शुल्क माफ कर बड़ी राहत दी। इसरो वैज्ञानिक और एनटीए चेयरमैन ने बताया भविष्य की तकनीक का महत्व
मुख्य अतिथि एनटीए चेयरमैन प्रोफेसर प्रदीप कुमार जोशी ने एआई (AI) टेक्नोलॉजी की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 2047 तक आत्मनिर्भर भारत के लिए नई चीजें सीखने की ललक (एडैप्टेबिलिटी) ही सफलता का राज होगी। विशिष्ट अतिथि के रूप में इसरो (ISRO) की साइंटिस्ट पूजा श्रीवास्तव, जो खुद इसी संस्थान के पहले बैच की छात्रा रही हैं, ने स्वदेशी नाविक सैटेलाइट सिस्टम के बारे में बताया। उन्होंने टीम वर्क और अनुशासन को सिद्धि का मूल मंत्र बताया। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य डा. प्रभाकर गुप्ता ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़ी और बताया कि इस वर्ष शिक्षकों के 114 शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जनरलों में प्रकाशित हुए हैं। इनकी रही मौजूदगी
इस अवसर पर ट्रस्ट सचिव आदित्य मूर्ति, आशा मूर्ति, ऋचा मूर्ति, देव मूर्ति, गुरु नारायण मेहरोत्रा, डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. शैलेश सक्सेना, डॉ. तरुण सिंह गंगवार सहित सभी विभागों के डायरेक्टर और डीन मौजूद रहे।