“मैंने अपना बेटा खोया और हम लोगों पर ही पुलिस ने लाठियां चलाई। मेरे पति को भी चोट लग गयी। भगदड़ में मेरे बेटे का शव लावारिस की तरह रोड पर पड़ा रहा। यदि पुलिस पहले ही कोई कार्रवाई करती तो हम लोग शव रखकर धरना-प्रदर्शन क्यों करते।” यह कहना है आलोक सिंह की मां बेबी सिंह का जिनके 18 वर्षीय बेटे की 27 अक्टूबर को खुटार-लखीमपुर बाईपास हाइवे के निकट भुसौरिया गाँव में होटल संचालक ने बेरहमी से पिटाई की थी। जिसकी 6 नवम्बर को उसकी मौत हो गयी थी। पहले देखें, 2 तस्वीरें… अब जानिए पूरा मामला दैनिक भास्कर पूरे मामले की हकीकत जानने के लिए भुसौरिया गांव पहुंची। जहां पर परिजनों व ग्रामीणों ने पुलिस की बर्बरता की कहानी बताई। सबसे पहले हमारी मुलाकात पीड़ित परिवार से हुई जहां पर आलोक में पिता पप्पी सिंह घर के बाहर बैठे हुए थे। उनसे बात करने पर बताया कि आलोक ही घर का इकलौता कमाने वाला था। हमारा बेटा गया और पुलिस ने हम पर ही लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस की लाठी से मेरे हाथ में चोट आयी। यदि पुलिस 10 दिन पहले दी तहरीर पर कार्रवाई करती तो शायद विपक्षी मनोज हमारे बेटे का इलाज करवा देता और वह जिंदा होता। मां बेबी सिंह ने बताया कि घटना के दिन मेरे बेटे को दुकान के अंदर बंद करके मारा गया। यह होटल आशीष अवस्थी के घर के निकट संचालित है। जिस पर जगत नारायण की बेटी बैठती है। मनोज उसी होटल पर समोसे, मिर्च बनाता है। 27 अक्टूबर की सुबह मेरा बेटा आलोक टेंट की दुकान पर खड़ा हुआ था। जगत नारायण की बेटी ने कहा कि यह वही लड़का है जिस पर 20 रूपये उधार हैं। वहीं से मनोज उसको पकड़कर ले गया और उसको लात-घूसों से मारना शुरू कर दिया । उसके बाद हम लोग नानक चौकी तहरीर देने गये। तहरीर देने के बाद मनोज ने हम लोगों को शिवम काम्प्लेक्स में बने आफिस में बुलाया। जहां पर कन्हई ने हम लोगों से कहा कि मनोज मेरे बेटे का इलाज करायेगा लेकिन, न उसने इलाज कराया और न ही पुलिस ने कोई एक्शन लिया। उसके बाद हम लोग जैसे-तैसे मजदूरी कर बेटे का इलाज कराते रहे। इधर 6 नवम्बर को उसकी तबीयत खराब हुई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी। गांव की माया देवी ने बताया कि जब पुलिस ने लाठियां चलाईं, तो सभी लोग शव छोड़कर भाग गए। मामा बोले- पुलिस नहीं सुन रही शिकायत आलोक के मामा पंकज ने बताया कि नानक चौकी पर तहरीर दी गई, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस अभी तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। इस मामले में जब परिजनों ने ग्रामीणों सहित शव रखकर न्याय की गुहार लगाई तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। जिसके बाद आरोपी मनोज वर्मा के ऊपर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस बोली- सही इलाज कराया होता तो बेटा जिंदा होता गोला कोतवाल अम्बर सिंह ने बताया कि परिजनों ने तहरीर देने के बाद आरोपी से समझौता कर लिया और चुप बैठ गये। यदि अपने बेटे का सही से इलाज कराते तो वह जीवित होता। पुलिस पर गलत आरोप लगाया जा रहा है। आलोक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में किडनी फेल होना आया है। चोट की वजह से उसकी किडनी में खून जम गया था। आरोपी मनोज पर मुकदमा दर्ज कर उसकी तलाश जारी है।