‘हेलो…मैं श्रम विभाग का कमिश्नर बोल रहा हूं:गोरखपुर AIIMS में डॉक्टरों को फोन पर हड़काकर करवाया इलाज, खुलासा होने पर मांगी माफी

‘हेलो, मैं श्रम विभाग का कमिश्नर बोल रहा हूं। मेरा रोगी आपके OPD के बाहर खड़ा है….उसे तत्काल देखिए। यदि जरूरत हो तो खुद जाकर जांच करके इलाज कीजिए और मुझे बताइए। इसमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए, समझे।’ गोरखपुर AIIMS में पिछले छह महीने से डॉक्टरों को एक युवक फोन कर खुद को श्रम विभाग का कमिश्नर बताकर मरीजों के इलाज की पैरवी करता रहा। युवक के आत्मविश्वास भरे अंदाज के कारण डॉक्टर भी उसे अधिकारी समझकर उसके बताए मरीजों को तुरंत देख लेते थे और जरूरत पड़ने पर भर्ती व जांच की व्यवस्था भी कराते थे। धीरे-धीरे जब ऐसे फोन लगातार आने लगे तो डॉक्टरों ने आपस में इस बारे में चर्चा की। पता चला कि वह युवक 10 से अधिक डॉक्टरों के संपर्क में था। डॉक्टर जिन कर्मचारियों को मरीज के साथ भेजते थे, उनसे भी वह मोबाइल नंबर लेकर दबाव बनाता था। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक अधिकारी को इसकी जानकारी मिली और उन्होंने उस मोबाइल नंबर पर फोन किया। परिचय देने पर युवक माफी मांगने लगा। उसने बताया कि वह दिल्ली का रहने वाला है और गोरखपुर में उसके कई परिचित हैं। अपने गांव और रिश्तेदारों के बीच प्रभाव जमाने के लिए वह खुद को बड़ा अधिकारी बताकर लोगों की पैरवी करता था। जब काम हो जाता था तो लोग उसकी तारीफ करते थे, जिससे उसका हौसला बढ़ता गया। ‘कहां है मेरा पीएस’ से हुआ शक
डॉक्टरों का कहना है कि युवक इतनी आत्मविश्वास से बात करता था कि उन्होंने उसका नंबर “श्रम विभाग के अधिकारी” के नाम से सेव कर लिया था। हालांकि फोन काटने से पहले वह अक्सर पूछता था, “कहां है मेरा पीएस?” इससे डॉक्टरों को थोड़ा शक जरूर होता था, लेकिन व्यस्तता के कारण वे इसकी जांच नहीं कर पाए। जनप्रतिनिधि का पीआरओ बनकर भी की पैरवी
डॉक्टरों ने बताया कि हाल ही में उसी युवक ने एक वरिष्ठ डॉक्टर को फोन कर खुद को एक बड़े जनप्रतिनिधि का जनसंपर्क अधिकारी बताते हुए मरीज का सीटी स्कैन तुरंत कराने को कहा। यह सुनकर डॉक्टर अपना OPD छोड़कर मरीज का सीटी स्कैन कराने पहुंचे। बाद में पता चला कि युवक अस्पताल में ही काम करता है और लोगों पर प्रभाव जमाने के लिए इस तरह की पैरवी करता था। मामले के सामने आने के बाद युवक ने डॉक्टरों को फोन करना बंद कर दिया है।