बहुचर्चित अनुराग शर्मा हत्याकांड में करीब पांच साल बाद एडीजे सेकंड की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मामले के 4 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत के इस फैसले से मृतक के परिजनों में गहरा असंतोष और निराशा देखने को मिली है। मृतक अनुराग शर्मा की मां पुष्पा देवी ने कहा कि उन्हें न्याय नहीं मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी। वहीं, अनुराग की पत्नी शालिनी शर्मा ने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए अपील के जरिए इंसाफ पाने की बात कही। शिव सेना के पूर्व जिला प्रमुख अनुराग शर्मा की हत्या 20 मई 2020 की रात को हुई थी। घटना के समय वह स्कूटी से घर जा रहे थे। रास्ते में बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता अमित कुमार ने बताया कि अदालत ने मौके के गवाह को स्वीकार नहीं किया, जिसके चलते आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार की ओर से इस फैसले के खिलाफ अपील किए जाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस मामले में जिन आरोपियों को बरी किया गया है, उनमें छत्रपाल, पवन, हिमांशु उर्फ बाबू और राजदूरिया शामिल हैं। इनमें से छत्रपाल फिलहाल जेल में बंद है, जबकि पवन, हिमांशु और बाबू राजदूरिया जमानत पर रिहा हैं। गौरतलब है कि 20 मई 2020 की शाम करीब 6:30 बजे शिवसेना जिला प्रमुख अनुराग शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के अगले दिन 21 मई को मृतक की पत्नी शालिनी शर्मा ने सिविल लाइन थाना में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने 29 मई 2020 को मामले का खुलासा करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अनुराग शर्मा ठेकेदारी, टेंपो अड्डा संचालन और राजनीति में सक्रिय थे। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा के बाद स्नातक तक पढ़ाई की थी और हिंदुत्व की विचारधारा से जुड़कर शिवसेना में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जिससे उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। अनुराग शर्मा अपने पीछे तीन बेटियां, एक बेटा और मां को छोड़ गए हैं। उनकी दो बेटियां और बेटा अभी पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि एक बेटी नोएडा में निजी नौकरी करती है। कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर परिवार के सामने न्याय की लड़ाई का सवाल खड़ा हो गया है।