भाजपा नेता अपर्णा यादव और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की शादी टूटने की कगार पर है। प्रतीक ने सोमवार को इंस्टाग्राम पर अपर्णा से तलाक लेने की बात कही। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में कई सवाल घूमने लगे हैं। अगर अपर्णा का रिश्ता टूटता है, तो भाजपा का क्या रुख होगा? पार्टी उनका कितना साथ देगी? क्या उनका राजनीतिक भविष्य दांव पर लग गया है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुलायम सिंह की बहू और अखिलेश के भाई की पत्नी होना ही अपर्णा की राजनीति का आधार या यूं कहें कि USP (यूनिक सेलिंग पॉइंट) है। पार्टी ने समय-समय पर अपर्णा से सपा के खिलाफ चुनाव प्रचार कराकर फायदा भी उठाया है। ऐसे में अगर तलाक हुआ, तो उनके पॉलिटिकल करियर पर बड़ा असर पड़ेगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… भाजपा ने सपा के खिलाफ अपर्णा को चेहरा बनाया मुलायम परिवार की बहू होना ही अपर्णा की USP
राजनीतिक विश्लेषक योगेश मिश्रा मानते हैं- अपर्णा यादव बिष्ट का मुलायम सिंह परिवार की बहू होना ही एकमात्र यूएसपी है। अपर्णा खुद उत्तराखंड के ठाकुर परिवार की बेटी हैं। भाजपा में महिला मोर्चा से लेकर मेन बॉडी में कई ठाकुर महिलाएं पदाधिकारी हैं। लेकिन, अपर्णा को केवल इसलिए आगे बढ़ाया जा रहा है, क्योंकि वह अखिलेश के भाई प्रतीक यादव की पत्नी हैं। अगर दोनों का रिश्ता नहीं रहता, तो अपर्णा को सामाजिक और राजनीतिक फ्रंट पर परेशानी का सामना करना पड़ेगा। राजनीतिक भविष्य दांव पर लग सकता है
राजनीतिक विश्लेषक अनिल सिंह मानते हैं- अपर्णा और प्रतीक यादव अगर शादी तोड़ते हैं, तो इसका सीधा असर अपर्णा के राजनीतिक जीवन पर भी पड़ेगा। अगर उनका यादव परिवार से रिश्ता टूटा, तो भाजपा सपा के खिलाफ उन्हें चेहरा नहीं बना सकेगी। पार्टी के अंदर भी उनके विरोधी मुद्दा बनाएंगे। कहेंगे कि जब अपर्णा का यादव परिवार से कोई संबंध नहीं रहा, तो उन्हें चेहरा क्यों बनाया जाए? वैसे भी भाजपा में अपर्णा का फ्यूचर ज्यादा उज्ज्वल नजर नहीं आता, क्योंकि वह जननेता नहीं हैं। बतौर नेता उनकी छवि अपीलिंग भी नहीं है। भाजपा तलाक को मुद्दा भी बना सकती है
राजनीति के जानकारों का एक वर्ग मानता है कि अपर्णा को महिलाओं की सहानुभूति दिलाने के लिए इसे मुद्दा बनाया जा सकता है। पार्टी रणनीतिक रूप से प्रतीक पर हमलावर हो सकती है कि उन्होंने किस तरह सोशल मीडिया पर अपनी पत्नी को बदनाम करने वाली पोस्ट की? इसकी आड़ में पार्टी सपा को घेर भी सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो वह एक बार फिर अपर्णा का सैफई के यादव परिवार के खिलाफ उपयोग कर सकती है। महापौर पद की दावेदार थीं अपर्णा
अपर्णा ने 2023 में लखनऊ नगर निगम चुनाव में महापौर पद के लिए दावेदारी की थी। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक RSS और भाजपा के कई नेता उनकी पैरवी कर रहे थे। लेकिन, लखनऊ महापौर का टिकट रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को तय करना था। सूत्रों के मुताबिक, अपर्णा यादव राजनाथ सिंह की कसौटी पर खरी नहीं उतरी थीं। इससे पहले अपर्णा ने लखनऊ कैंट और सरोजनी नगर से भी 2022 में टिकट की दावेदारी की थी। 2022 में ऐसी भी अटकलें लगाई गई थीं कि भाजपा उन्हें अखिलेश के खिलाफ उम्मीदवार बना सकती है। लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ था। महिला आयोग में काफी मुश्किल से जॉइन किया था
अपर्णा यादव राज्य महिला आयोग में उपाध्यक्ष पद मिलने से खुश नहीं थीं। वह कम से कम अध्यक्ष पद चाहती थीं। उपाध्यक्ष पद मिलने से नाराज अपर्णा ने कुछ दिनों तक जॉइन नहीं किया था। उसके बाद भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और सीएम योगी से बातचीत के बाद पद संभाला था। ———————– ये खबरें भी पढ़ें- लखनऊ में अपर्णा यादव के घर के बाहर सन्नाटा छाया अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक के इंस्टाग्राम पर अपनी पत्नी अपर्णा के खिलाफ किए गए पोस्ट 24 घंटे बाद भी लगे हुए हैं। वहीं, इन 2 पोस्ट के बाद से अपर्णा के घर के बाहर सन्नाटा छाया है। घर पर उनके मुख्य सुरक्षा अधिकारी मौजूद हैं, इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि अपर्णा घर के अंदर ही हैं। पढ़ें पूरी खबर अपर्णा की आवाज पर फिदा हो गए थे प्रतीक यादव, शादी में मुलाकात, ईमेल से इजहार यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक यादव के परिवार में कलह अब सार्वजनिक हो चुकी है। प्रतीक ने सोमवार सुबह इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके तलाक के फैसले की जानकारी दी। बताया- वे अपर्णा यादव को तलाक देने जा रहे हैं। अपर्णा पर गंभीर आरोप भी लगाए। पोस्ट में लिखा- ‘उसने मेरे पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया। पढ़ें पूरी खबर