अयोध्या में भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। सिद्धपीठ श्री हनुमत निवास के महंत स्वामी सिया शरण महाराज की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। इस अवसर पर श्री हनुमत निवास के वर्तमान पीठाधीश्वर डाक्टर मिथिलेश नंदिनी शरण की अध्यक्षता में संत-महंतों, धर्माचार्यों, भक्तों व अतिथियों का समागम हुआ। भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ हनुमत निवास परिसर में उमड़ पड़ी। भजन-कीर्तन और रामधुन के मधुर स्वर वातावरण में गूंज उठे। सैकड़ों संत-महंतों और हजारों भक्तों ने भक्ति भाव से प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में संत समाज ने महंत सिया शरण महाराज के आध्यात्मिक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें संत परंपरा का गौरव बताया। इस अवसर पर दशरथ महल पीठाधीश्वर बिंदुगद्दाचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य महाराज, मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास महाराज, श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास, कोसलेश सदन पीठाधीश्वर जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर, रंग महल पीठाधीश्वर राम शरण दास, तथा रसिकाचार्य स्वामी जनमेजय शरण जी महाराज सहित अनेक प्रतिष्ठित संतों ने कार्यक्रम में शिरकत की। इसके अलावा उदासीन ऋषि आश्रम के पीठाधीश्वर डॉ. भरत दास जी महाराज, लक्ष्मण किला पीठाधीश्वर स्वामी मैथिली रमण शरण महाराज, बावन मंदिर पीठाधीश्वर स्वामी वैदेही वल्लभ शरण, पत्थर मंदिर के पीठाधीश्वर स्वामी मनीष दास, डांडिया मंदिर पीठाधीश्वर स्वामी गिरीश दास, हनुमान गढ़ी से जुड़े महंत गौरी शंकर दास, खाक चौक के श्री महंत बृजमोहन दास उपस्थित रहे। कई धर्मनिष्ठ नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। संतों ने इस अवसर पर कहा कि स्वामी श्री सिया शरण जी महाराज का संपूर्ण जीवन सेवा, भक्ति और संत परंपरा के संवर्धन के लिए समर्पित रहा। उनके मार्गदर्शन में हनुमत निवास न केवल साधना का केंद्र रहा, बल्कि अयोध्या के धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का भी प्रमुख स्थल बन गया।
कार्यक्रम के समापन पर आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने सभी उपस्थित संत-महंतों, अतिथियों और भक्तों के प्रति आभार व्यक्त किया। कहा कि यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि संत परंपरा की निरंतरता का प्रतीक है।