अयोध्या को शैक्षिक रूप से विशिष्ट पहचान दिलाने के उद्देश्य से “वाणी और व्यवहार” विषय पर प्रभावी शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन हर्षवर्धन सिंह (संस्थापक, रामराज्य अयोध्या फाउंडेशन एवं प्रदेश महामंत्री, भारतीय जनता युवा मोर्चा) के नेतृत्व में हुआ। कार्यशाला झुनझुनवाला ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट परिसर स्थित झुनझुनवाला ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुई। मुख्य अतिथि नरेंद्र भदौरिया (निदेशक, विश्व संवाद केंद्र लखनऊ) ने शिक्षकों के चरित्र, आदर्श आचरण और विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में उनके व्यवहार की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रभावी संप्रेषण और सकारात्मक दृष्टिकोण से कक्षा का वातावरण प्रेरक बनता है, जिससे सीखने की गुणवत्ता स्वतः बढ़ती है। अपने संबोधन में हर्षवर्धन सिंह ने कहा कि अयोध्या को आध्यात्मिक नगरी के साथ-साथ शैक्षिक उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में स्थापित करना समय की आवश्यकता है। यदि शिक्षण प्रक्रिया में संवाद-कौशल, संस्कार और नैतिक मूल्यों का समावेश किया जाए, तो अयोध्या देश के लिए आदर्श शैक्षिक मॉडल बन सकती है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. शालिनी अग्रवाल ने संवाद-कौशल आधारित सहभागिता कार्यशाला का संचालन किया। इसमें शिक्षकों ने व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से प्रभावी संप्रेषण, सकारात्मक भाषा प्रयोग और विद्यार्थियों से संवेदनशील संवाद के व्यावहारिक तरीके सीखे। कार्यशाला में टाइनी टॉस स्कूल, जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल तथा झुनझुनवाला ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट के प्राचार्यों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रतिभागियों ने इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की अपेक्षा जताई। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी शिक्षकों के कौशल विकास के लिए निरंतर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।