ध्वजारोहण के बाद शाम ढलते ही अयोध्या के मंदिरों से श्रीराम विवाह की भव्य बारात धूमधाम के साथ निकल चुकी है। प्रसिद्ध मंत्रार्थ मंडपम से शुरू हुई इस शोभायात्रा में भगवान राम सहित चारों भाईयों के दिव्य स्वरूप आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सैकड़ों महिलाएं नाचते-गाते हुए राम पथ पर आगे बढ़ रही हैं, जिससे पूरे मार्ग में उत्सव जैसा माहौल बन गया है। बिअहुती भवन से निकली राम बारात में बिहार से आई महिलाओं ने जमकर नेतृत्व किया। हाथी, घोड़े और बड़ी संख्या में साधु-संतों ने बारात में शामिल होकर इसकी भव्यता और बढ़ा दी। ध्वजारोहण समारोह के बाद शुरू हुई इस परंपरागत बारात को लेकर अयोध्या उत्साह से सराबोर है। बैंड-बाजों की गूंज से शहर थम गया है और लाखों भक्त बाराती बनकर इस पवित्र विवाह उत्सव के साक्षी बन रहे हैं। सबसे पहले देखिए राम बारात की 3 तस्वीरें…. राम विवाह उत्सव में डूबी अयोध्या
अयोध्या नगरी इन दिनों अपूर्व आनंद और भक्तिभाव से सराबोर है। राम विवाह महोत्सव के चलते शहर में विवाह के मंगल गीत गूंज रहे हैं। संत-महंत भगवान श्रीराम के नाम, रूप, लीला और धाम में मग्न हैं। मिथिला से आई सखियां जहां-जहाँ बारात गुज़र रही है, वहां पारंपरिक मंगल गीतों से माहौल भक्तिमय कर रही हैं। कनक भवन, दशरथ महल, रंग महल, लक्ष्मण किला, जानकी महल ट्रस्ट, हनुमत निवास, मंत्रार्थ मंडपम, रामसखी मंदिर, गहोई मंदिर और दिव्य कला कुंज से राम बारात निकली, जिससे पूरे शहर में उत्सव का रंग छा गया है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लोक-रीतियों से कराया जाएगा विवाह
श्रीरामवल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास ने बताया-बारातों के मंदिरों में वापस लौटने पर भगवान श्रीराम और सीता जी की मूर्तियों व स्वरूपों का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लोक-रीतियों से विवाह कराया जाएगा। अगले दिन, 26 नवंबर को औपचारिक राम विवाह संपन्न होगा। कनक भवन में यह उत्सव परंपरा के अनुसार श्रीराम के गौना उत्सव तक चलता है। इसलिए यहां विशेष आयोजन लगातार जारी रहेंगे। विवाह और कलेवा की रस्में भव्यता के साथ होगी
स्वामी राजकुमार दास ने बताया- आश्रम में विवाह और कलेवा की रस्में हर साल भव्यता के साथ होती हैं। आज रात वैदिक विधि से भगवान श्रीराम और माता सीता की मूर्तियों का विवाह संपन्न होगा, जबकि 26 नवंबर को दोपहर राम कलेवा का आयोजन किया जाएगा। समारोह के लिए मंदिर परिसर को देसी-विदेशी फूलों से सजाया गया है और भव्य रोशनी पूरे माहौल को उत्सव मय बना रही है। इसी बीच आचार्य पीठ लक्ष्मण किला में मिथिला से आई सखियों (युगल प्रिया सहित अन्य महिलाओं) के मंगलगान गूंज रहे हैं। वे बताती हैं कि बचपन से ही वे अयोध्या आकर भगवान के विवाह के मंगलगीत गाती रही हैं। इसे वें अपना सौभाग्य मानती हैं। जैसे-जैसे श्रीसीताराम विवाह का पावन क्षण करीब आता है, उनका मन आनंद और भक्ति से भर उठता है। यह उत्सव लोक और परलोक दोनों को आनंदित करने वाला है और भक्तों के जीवन को धन्य बना देने वाला प्रतीत होता है।