पीएम नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को राम मंदिर के स्वर्ण शिखर पर ध्वजारोहण करने आ रहे हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार अगहन शुक्ल पक्ष की पंचमी अर्थात सीता-राम विवाहोत्सव की तिथि है। इस तिथि को प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी नगरी के सैकड़ों मंदिरों में सीताराम विवाहोत्सव की तैयारी है। एक दर्जन मंदिरों से पारंपरिक सज-धज के साथ राम बारात भी निकलेगी। पर सुरक्षा कारणों और प्रोटोकाल की वजह से मंदिरों से रामबारात शाम 6 बजे के बाद ही निकल सकेगी। पीएम के आगमन और उससे जुड़े शिष्टाचार तथा सुरक्षा संबंधी शर्तों के चलते 25 नवंबर की पहली बेला तक रामनगरी में यातायात परिवर्तित-प्रतिबंधित रहेगा। उत्सव की तैयारियां भी मंदिरों के आंतरिक प्रांगण तक सिमटी रहेंगी। कोतवाल मनोज शर्मा ने विवाह-बरात की तैयारी में लगे संतों-महंतों की मीटिंग कर स्पष्ट कर दिया है कि जो भी तैयारी करनी है 25 नवंबर को सुबह 6 बजे तक कर लें, नहीं तो उनको फिर दोपहर 3 बजे के बाद ही मौका मिलेगा। तब तक के लिए रामनगरी के आंतरिक प्रभाग में शर्तों के साथ आवागमन संभव होगा। इस निर्देश के अनुरूप होम वर्क भी शुरू किया जा चुका है। जिन मंदिरों से बरात निकलनी है। बरातों के लिए पहले से अनुबंधित हाथी, घोड़ा, ऊंट, रथ तथा बैंड पार्टियों को विभिन्न क्षेत्रों से अगले मंगलवार के मध्याह्न तक आहूत किया गया था, किंतु पीएम के आगमन की व्यवस्था के चलते इनका सायं पहुंचना संभावित है और उसी हिसाब से बरात के प्रस्थान का समय नियत किया गया है। हालांकि मंदिरों में भी संशोधित समय के साथ उत्सव की व्यापक तैयारी है। दशरथ महल वही स्थल है, जहां युगों पूर्व श्रीराम का बचपन बीता और विरासत के अनुरूप यहां राम बारात राजसी ठाट से निकलती है। दशरथ महल पीठाधीश्वर महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य कहते हैं कि बारात प्रस्थान में कुछ विलंब जरूर होगा, किंतु हमारा उत्साह पूर्व से कुछ अधिक ही है। इस बार उत्सव में राम विवाहोत्सव के साथ रामजन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर का स्वर्ण कलश यशस्वी प्रधानमंत्री के हाथों फहराए गए ध्वज के उल्लास से भी युक्त होगा। बारात प्रस्थान की तैयारियों में लगे मधुर उपासना की शीर्ष पीठ रंगमहल के महंत रामशरण दास कहते हैं कि सीता-राम विवाहोत्सव के अति मंगलमयी उत्सव का आनंद प्रधानमंत्री भी लेते, तो अच्छा था। यद्यपि यह संभव हो पाना असंभव होगा। मंदिरों से एक-एक कर निकलने वाली निकलने वाली भव्यता की पर्याय दर्जन भर से अधिक बारात और उसमें शामिल होने वाले हजारों श्रद्धालुओं के चलते शाम के तीन-चार घंटों तक तिल तक रखने की जगह नहीं होती। ऐसे में प्रधानमंत्री जैसे शीर्षस्थ प्रोटोकाल वाले व्यक्ति को इसमें शामिल करने की बात तो दूर किसी औसत प्रोटोकाल वाले व्यक्ति का शामिल होना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होगा और प्रशासन को ऐसी चुनौती का सामना करना पड़े, तो आश्चर्य नहीं। जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानियां के अनुसार रामबारात और विवाह की भव्य तैयारियां हैं। प्रशासन से सहयोग मिलने के ऊपर है कि हम अपनी तैयारियों का उपयोग कितना कर पाते हैं।उन्होंने बताया कि रामबारात के लिए हाथी-घोड़़ा और ऊंट के साथ अनेक रथों की व्यवस्था है। दिल्ली से रामलीला के कलाकारों की टीम आ रही है। देश के हर राज्यों से मेहमानों को आना है।