अयोध्या में GST डिप्टी कमिश्नर ने मीडिया से बनाई दूरी:दिन भर ऑफिस से रहे नदारद, एक व्यापारी ने भीे आठ लाख रुपए लेने का भी लगाया आरोप

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देने के बाद यू-टर्न लेने वाले जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। सोमवार को एक कपड़ा व्यापारी ने उन पर 8 लाख रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगाया। प्रशांत कुमार सिंह ने 27 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा दे दिया था, लेकिन चार दिन बाद ही उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया। अफसर ने तब कहा था कि उनके ऊपर कोई दबाव नहीं है और फिलहाल वह अपने दफ्तर में काम कर रहे हैं। सोमवार सुबह करीब 10 बजे प्रशांत कुमार सिंह अपने कार्यालय पहुंचे। मीडिया के वहां पहुंचने पर वह कार्यालय से बाहर निकलकर एक वाहन में बैठकर चले गए। इसके बाद पूरे दिन वह कार्यालय में नजर नहीं आए। कारोबारी से 8 लाख की रिश्वत मांगने का भी आरोप
वहीं, रामनगरी के राजलक्ष्मी साड़ी-सूट के मालिक लक्ष्मण दास मखेजा ने कहा- बीते साल 2 अप्रैल को प्रशांत कुमार सिंह सर्च वारंट लेकर उनके प्रतिष्ठान पहुंचे थे। कार्रवाई के दौरान नियमों की अनदेखी करते हुए उन्होंने व्यापारी की दूसरी शाखा ‘श्री राजलक्ष्मी सूट एंड साड़ी’ पर भी छापेमारी कर दी। दोनों प्रतिष्ठानों का जीएसटी और टीन नंबर अलग-अलग होने के बावजूद स्टॉक को जोड़कर फ्रॉड दिखाया गया। इससे उन्हें आठ लाख रुपए से इस पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाई ने कहा था- प्रशांत ने नौकरी के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनवाया प्रशांत के इस्तीफे के बाद भाई विश्वजीत ने आरोप लगाते हुए कहा था- प्रशांत को दिव्यांग कोटे से नौकरी मिली थी। उनका दिव्यांगता प्रमाण-पत्र फर्जी है। इस शिकायत के बाद प्रमुख सचिव कामिनी रतन चौहान ने राज्य कर आयुक्त नितिन बंसल से रिपोर्ट तलब की थी। विश्वजीत ने अपनी बहन जया सिंह पर भी दिव्यांगता का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने का आरोप लगाया। जया सिंह इस समय कुशीनगर के हाटा तहसील में तहसीलदार हैं। उन्होंने भी कहा था कि भाई के आरोप निराधार हैं। मैं जांच के लिए तैयार हूं। ये आरोप पारिवारिक झगड़े के कारण लगाए जा रहे। अफसर बोले- मेरा भाई मुख्तार गैंग का सदस्य
प्रशांत कुमार सिंह ने भाई विश्वजीत सिंह पर गंभीर आपराधिक आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वजीत, मुख्तार अंसारी के मऊ गैंग का सक्रिय सदस्य है। वह उसका फाइनेंशियल एडवाइजर भी रहा है। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। विश्वजीत ने अपने माता-पिता के साथ मारपीट की, जिस मामले में एफआईआर भी दर्ज है। CMO बोले- जीएसटी अफसर को क्लीन चिट नहीं दी
मऊ सीएमओ डॉ. संजय गुप्ता ने बताया- प्रशांत सिंह को हमारे ऑफिस से कोई क्लीन चिट नहीं दी गई है। अयोध्या सीएमओ ने उनके दिव्यांग प्रमाण पत्र की प्रमाणिकता सत्यापित करने को कहा था। हमारे यहां से जवाब दिया गया कि 2009 में जारी किया गया प्रमाण पत्र हमारे कार्यालय से ही जारी किया गया था। जीएसटी अफसर को 2021 में दो बार मेडिकल बोर्ड के सामने प्रस्तुत होने के लिए बुलाया गया था। हालांकि, वह उस समय उपस्थित नहीं हुए। बीते शनिवार 30 जनवरी को भी उन्हें आजमगढ़ कार्यालय में उपस्थित होकर प्रमाण पत्र की जांच करवाने के लिए कहा गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए।