आजमगढ़ के फूलपुर इलाके का कुख्यात गौ तस्कर वाकिफ उर्फ वाकिब का पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जिसके बाद देर रात उसे फूलपुर क्षेत्र के कब्रिस्तान में दफनाया गया। गुरुवार सुबह यूपी एसटीएफ की मुठभेड़ में वह मारा गया। वाकिफ पर अलग-अलग जिलों में कुल 49 मुकदमे दर्ज थे। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था। पुलिस के अनुसार, वाकिफ लंबे समय से फरार चल रहा था और मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था, जिससे उसे ट्रैक करना मुश्किल हो रहा था। एसटीएफ टीम ने जीयनपुर थाना क्षेत्र के जोकहरा गांव में मुठभेड़ के दौरान वाकिफ को ढेर कर दिया। गांव के लोगों का कहना है कि वाकिफ पिछले 10 वर्षों से घर नहीं आया था। परिजनों ने भी उससे कोई संबंध न होने की बात कही। वाकिफ ने साल 2015 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था और तब से लगातार गौ तस्करी व अन्य अपराधों को अंजाम दे रहा था। 10 वर्षों में 49 मुकदमे, तीन जिलों में फैला अपराध नेटवर्क साल 2015 से 2025 तक वाकिफ लगातार अपराधों में सक्रिय रहा।आजमगढ़ के फूलपुर, अहिरौला, देवगांव, मुबारकपुर, रौनापार, सिधारी, कोतवाली और कंधरापुर थानों में 38 मुकदमे दर्ज थे।इसके अलावा गोरखपुर जिले में 5, संत कबीर नगर में 5 और जौनपुर में 1 मुकदमा दर्ज था। वाकिफ पर ₹50,000 का इनाम भी घोषित था। जोकहरा में हुई थी मुठभेड़ गुरुवार सुबह जीयनपुर थाना क्षेत्र के जोकहरा गांव में यूपी एसटीएफ और वाकिफ के बीच मुठभेड़ हुई। एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, वाकिफ लंबे समय से फरार चल रहा था और ट्रैक करना मुश्किल था क्योंकि वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था।मुठभेड़ में गोली लगने से वाकिफ की मौत हो गई। बाद में पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने कहा-7 साल से नहीं आया घर मृतक के चाचा इरशाद ने बताया कि वाकिफ विवाहित था और उसकी दो बेटियां हैं।उन्होंने कहा, वाकिफ का हम लोगों से कोई मतलब नहीं था। वह करीब सात साल से घर नहीं आया था। वाकिफ के पिता कलाम पांच भाइयों में से एक थे। परिवार के अन्य सदस्य भी अब उससे अलग रहते थे। पड़ोसी बोले-पुलिस से पता चला एनकाउंटर वाकिफ के पड़ोसी बबलू ने बताया कि गांव के लोगों को पुलिस से ही एनकाउंटर की जानकारी मिली। उन्होंने कहा, लगभग 10 साल से वाकिफ गांव नहीं आया था। कब्रिस्तान में मिट्टी दी गई, लेकिन उसकी कोई गतिविधि गांव में नहीं थी। बड़ा सवाल-इतने मुकदमों के बाद भी बेखौफ कैसे घूमता रहा वाकिफ? वर्ष 2015 से 2025 तक लगातार अपराधों में लिप्त रहने के बावजूद वाकिफ कानून की पकड़ से बाहर रहा। स्थानीय लोगों की चुप्पी और तंत्र की सुस्ती ने उसे एक 49 मुकदमों का कुख्यात अपराधी बना दिया। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इतने मुकदमों और इनाम के बाद भी वह वर्षों तक खुलेआम सक्रिय कैसे रहा?