‘इटावा की मजार 800 साल पुरानी, मुगलों से वास्ता नहीं’:केयर टेकर बोले– हम सच सामने लाएंगे, जायरीन ने कहा- बीहड़ वाले बाबा को कुछ हुआ तो करिश्मा होगा

‘इटावा की जिस मजार को वन विभाग की जमीन पर बताया गया है वो मजार बीहड़ वाले सैयद के नाम से करीब 800 साल से प्रसिद्ध है। 100 साल से यहां सालाना उर्स प्रशासन की मदद से होता आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स में इसे मुगल शासक मो. गौरी के सेनापति शमशुद्दीन की मजार होने का जिक्र किया जा रहा है, जोकि एक शिगूफा है। वन विभाग ने जल्दबाजी में कार्रवाई की है। नोटिस का जवाब देने के बाद पूरे मामले की सही स्थिति सामने रखी जाएगी। कुछ लोग इसे मुगल शासक के सेनापति की मजार बता रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है।’ ये दावा है इटावा के मजार के केयरटेकर फजले इलाही व उनके सहयोगी नदीम अहमद का…। इनका कहना है कि हमें मिले नोटिस का जवाब डाक से और खुद विभाग के कार्यालय जाकर दिया जा चुका है। जल्द ही सच सामने आएगा। फिलहाल मजार के कच्चे रास्ते पर अफसरों ने 5 फीट से ज्यादा गहरे गड्ढे खोद दिए हैं ताकि कोई मजार पर न जा सके। हम आपको मजार से ग्राउंड रिपोर्ट पढ़वाते हैं…. अब समझिए पूरा मामला दरअसल , इटावा जिला मुख्यालय से करीब डेढ़ किमी दूर फिशर वन क्षेत्र में बनी बीहड़ वाले सैयद बाबा की पुरानी मजार सीएम ऑफिस से आए आदेश के बाद प्रशासन की नजर में आ गई है। 3 जनवरी को आईजीआरएस के माध्यम से मुख्यमंत्री कार्यालय को की इस मजार को अवैध बताकर शिकायत की गई। 5 जनवरी को ही जिले के डीएम ऑफिस को आदेश मिला कि ये मजार वन विभाग की जमीन पर निर्मित है, इसकी जांच कर आख्या प्रस्तुत की जाए। आदेश आने के बाद वन विभाग ने आनन फानन में जांच की। जांच के दौरान वन विभाग के वन रेंज अधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने पाया कि यह मजार फिशर वन के कंपार्टमेंट नंबर तीन में स्थित है और पूरी तरह वन भूमि के भीतर बनी हुई है। टीम ने मौके पर पहुंचकर मापजोख की और पुराने नक्शों का अवलोकन किया, जिसमें यह क्षेत्र वन भूमि के अंतर्गत दर्ज पाया गया। नोटिस में ये लिखा फिशर 1 में बनी इस मजार के निरीक्षण के दौरान पाया गया कि एक बहुत पुरानी मजार बनी हुई है। स्थानीय लोगों से पता चला कि फजले इलाही पुत्र करीब बख्श इस मजार की देखभाल करते हैं। प्रभारी की तरफ से कई बार कॉल की गई लेकिन बताया गया कि कागजातों की जानकारी करके सूचित किया जाएगा। लेकिन नोटिस मिलने के 15 दिन बाद भी 22 जनवरी 2026 तक मजार के संबंध में कोई अभिलेख नहीं दिए गए। नोटिस मिलते ही तत्काल कागजात कार्यालय में दें, अन्यथा वन भूमि पर बनी इस मजार को ध्वस्त कर दिया जाएगा। जवाब न मिलने पर 5 गड्‌ढे खोदकर रोका रास्ता मजार कमेटी की तरफ से कोई जवाब न मिलने पर वन विभाग की तरफ से मजार तक जाने वाले करीब एक किमी के कच्चे रास्ते पर बुलडोजर से गुरुवार को एक और शुक्रवार को 3 फीट गहरे 4 गड्‌ढे खोद दिए गए। ताकि मजार तक कोई जा न सके। सालान उर्स को रोकने का साजिश मजार की देखरेख इटावा शहर के आकालगंज निवासी फजले इलाही करते हैं। उनके सहयोगी नदीम ने बताया– ये मजार 800 साल पुरानी है। कुछ लोग इसे मुगल शासक के सेनापति की मजार बता रहे हैं, जो पूरी तरह गलत और निराधार है। मेरी कई पीढ़ियो ने इसे देखा है। आगे वाली पीढ़ी भी देखेगी। हर साल फरवरी या मार्च में रमजान से पहले चांद देखकर मजार पर सालाना उर्स होता है। जिसमें हजारों लोग आते हैं। प्रशासन ने शिकायत पर जल्दबाजी में एक्शन लिया है। सर्वे के दौरान मजार के केयरटेकर को सूचित नहीं किया गया। सीधे नोटिस थमा दी गई। नोटिस में शिकायतकर्ता का नाम तक नहीं है। जायरीन बोले– मैं 22 साल से मजार पर आ रहा मजार पर पहुंचे जायरीन मुस्ताक ने बताया– मैं पिछले 20 से 22 साल से यहां आ रहा हूं और मेरे पूर्वजों ने बताया था कि यह दरगाह बहुत पुरानी है। यह बीहड़ वाले बाबा की दरगाह के नाम से जानी जाती है और यहां नियमित रूप से उर्स व अन्य धार्मिक कार्यक्रम होते रहे हैं। यहां जो मुराद मांगी जाती है वो पूरी होती है। रफीक बोले– मजार पर हिंदू–मुस्लिम आते है दरगाह पर पहुंचे जायरीन मो. रफीक ने बताया– इस मजार पर लोगों की मुरादें पूरी होती हैं और यहां मुसलमानों के साथ साथ हिंदू समुदाय के लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं। रास्ता बंद होने के कारण हम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर मजार टूटी तो अच्छा नहीं होगा शान मोहम्मद ने बताया– ये मजार बहुत पुरानी है। इसको तोड़ना ठीक नहीं है। मजार में बहुत शक्ति है, अगर से तोड़ा गया तो इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा। जो कुछ होगा अपने आप होगा। कोई कुछ करेगा नहीं। डीएफओ विकास नायक ने बताया– केयरटेकर फजले इलाही ने मजार के दस्तावेज देने की बात कही थी। लेकिन तय समय सीमा तक कोई भी कागजात वन विभाग को नहीं मिले। इसके बाद विभाग ने मजार को प्रथम दृष्टया अवैध मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। —————
ये खबर भी पढ़ें अविमुक्तेश्वरानंद बोले-योगी 40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण दें:गाय को गोमाता घोषित करें, वरना मानेंगे सिर्फ दिखावे के लिए गेरुआ पहना प्रयागराज माघ मेला छोड़ने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा- मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र मांगा गया। वह मैंने दे दिया। मेरे प्रमाण सच्चे थे, इसलिए उन्हें मानना पड़ा। अब प्रमाण मांगने का समय पीछे छूट गया। अब मुख्यमंत्री को अपने हिंदू होने का प्रमाण देना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें