रायबरेली में ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले रामदेव के बेटे विमल कुमार IAS बन गए हैं। उनकी UPSC में 107वीं रैंक आई है। सिलेक्शन की खुशी में विमल कुमार ने 7 किलोमीटर तक काफिले के साथ जुलूस निकाला। उनके काफिले में 12 कारें, डीजे और 50 से ज्यादा बाइकें शामिल थीं। लोगों ने जगह-जगह विमल का स्वागत किया और फूल-माला पहनाया। बेटे की सफलता से पिता रामदेव की भी आंखें भर आईं। अपनी सफलता के बारे में विमल कुमार बताते हैं- नवोदय विद्यालय में एक बार डीएम मैम आई थीं। उसी समय मैंने तय कर लिया था कि IAS ही बनूंगा। खर्च कम हो, इसलिए गांव में रहकर ही 3 बार ऑनलाइन क्लास ली। पढ़िए विमल कुमार के IAS बनने की कहानी… पहले 3 तस्वीरें देखिए… रायबरेली जिले के खीरो ब्लॉक के चांदेमऊ गांव में रामदेव रहते हैं। उनके 3 बेटे और 2 बेटियां हैं। विमल कुमार (30) सबसे छोटे बेटे हैं। बेटे के IAS बनने पर रामदेव कहते हैं- बहुत खुशी है। मैंने ईंट भट्ठे पर मजदूरी और बंटाई पर खेती करके बेटे को पढ़ाया है। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर दूर चांदेमऊ गांव पहुंची। उस समय विमल कुमार कार में सवार थे। परिवारवाले और गांववाले उन पर फूल बरसा रहे थे। पीछे डीजे बज रहा था। जैसे-जैसे विमल का काफिला आगे बढ़ता गया, काफिले में कारें और बाइक शामिल होती गईं। धीरे-धीरे काफिले में 12 से ज्यादा कारें और 50 से ज्यादा बाइक शामिल हो गईं। लोग विमल को रोक-रोककर फूल बरसाने और माला पहनाने लगे। 7 किलोमीटर का जूलुस करीब 2 घंटे तक निकाला गया। इसके बाद गांव के युवक विमल कुमार को लेकर घर पहुंचे। घर में भी बधाई देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। हमने विमल के बड़े भाई अजीत कुमार ने बात की। अजीत बताते हैं- परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण है। मैं खुद भी रायबरेली में मजदूरी करता हूं। आर्थिक तंगी के बावजूद हम लोगों ने विमल की पढ़ाई में कभी रुकावट नहीं आने दी। लगातार उनका हौसला बढ़ाया। विमल की भाभी कहती हैं- इतने संघर्षों के बाद यह सफलता मिली है। घर में बहुत सारी दिक्कतें और बाधाएं थीं, लेकिन विमल ने लक्ष्य नहीं छोड़ा। होली में आए थे। कल रिजल्ट आया, तो कहने लगे कि भाभी मेरा रिजल्ट आ गया। मेरा सिलेक्शन हो गया है। दरवाजे पर भैंसें बंधी, हाल ही में मकान का प्लास्टर हुआ
विमल का घर आधा पक्का और आधा कच्चा है। 5 कमरे हैं, जिनमें से 2 ही पक्के बने हैं। विमल से बड़े भाई विदेश कमाने गए हैं, जिससे घर की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। इसके बाद घर के फ्रंट का हिस्सा प्लास्टर किया गया है। उनके घर के बाहर दो भैंसें बंधी हैं। इसके अलावा चारा काटने की मशीन और भूसा रखा है। गांव के प्राइमरी स्कूल से पढ़ाई, आईआईटी में पहुंचे
परिवार के लोग बताते हैं- विमल कुमार ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय चांदेमऊ से पूरी की। इसके बाद उनका सिलेक्शन जवाहर नवोदय विद्यालय महाराजगंज में हुआ। वहां से उन्होंने 10वीं कक्षा तक पढ़ाई की। आगे की पढ़ाई के लिए वह केरल गए और फिर उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली पहुंचे। साल- 2020 में विमल कुमार ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की। इसके लिए उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। अधिकतर तैयारी रायबरेली में रहकर सेल्फ स्टडी से की। विमल बताते हैं- साल- 2021 से 2025 के बीच लगातार UPSC की परीक्षा दी। कोरोना महामारी के दौरान भी बिना कोचिंग तैयारी जारी रखी। पहले 4 प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन अंतिम सिलेक्शन नहीं हो सका। इसके बाद भी मैंने हार नहीं मानी। लखनऊ में रहकर तैयारी की और 5वें प्रयास में इंटरव्यू भी पास कर लिया। इस बार मुझे 107वीं रैंक मिली। ऑनलाइन तैयारी की, चार साल फेल्योर फेस किया
विमल कुमार बताते हैं- ऑनलाइन तैयारी करने से खर्च कम पड़ा। मैंने लगातार 4 साल फेल्योर फेस किया है। पिछले साल (2024 में) मैंने इंटरव्यू दिया था, जिसमें 12 नंबर कम होने से सिलेक्शन नहीं हो पाया था। फेल होने पर बहुत हताशा हुई थी। इसके बावजूद मैंने हार नहीं मानी। एक बार फिर कोशिश की और पास हो गया। विमल कुमार कहते हैं- नियमित अध्ययन, अनुशासन और समय का सही उपयोग ही सफलता की असली कुंजी है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत जारी रखी जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। जानिए यूपी से सिलेक्ट हुए कैंडिडेट्स के बारे में ————————— ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में सड़कों पर उतरे लोग; अब्दुल्ला चतुर्वेदी की शव यात्रा निकाली, पुतला फूंका बिहार के मौलाना अब्दुल्ला सालिम चतुर्वेदी ने यूपी के CM योगी आदित्यनाथ की मां पर आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान दिया है। इससे भाजपा कार्यकर्ता और योगी फैंस भड़क उठे हैं। शनिवार को लखनऊ में लोगों ने मौलाना का पुतला फूंका। उसे पैरों से कुचला। पढ़े पूरी खबर…