एयरफोर्स विंग कमांडर के ससुर ने खुद को गोली मारी:कनपटी को छूकर निकली बुलेट, कोरोना में पत्नी की मौत हुई; अकेले रहते थे

कानपुर में एयरफोर्स विंग कमांडर के ससुर ने खुद को गोली मार ली। बुधवार दोपहर घर में उन्होंने सुसाइड की कोशिश की। गोली सिर को छूते हुए निकल गई। गोली की आवाज सुनकर घर में काम कर रहा नौकर कमरे में पहुंचा तो बुजुर्ग के हाथ में लाइसेंसी रिवाल्वर फंसी देखी। आनन-फानन उसने पुलिस को सूचना दी। नवाबगंज थाना पुलिस ने बुजुर्ग को रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया है। पुलिस को उनके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें उन्होंने लिखा- मैं अपने दर्द को अब सह नहीं पा रहा हूं। अपनी बीमारी से बहुत परेशान हो चुका हूं, इसलिए अपनी जान दे रहा हूं। मेरी मौत के बाद किसी पर सवाल न उठाए जाएं। हालांकि वह बच गए। नवाबगंज थाना क्षेत्र के आजाद नगर में रहने वाले 73 साल के सत्येंद्र कुमार गुप्ता की सोनालिका ट्रैक्टर की साल 2002 में एजेंसी थी। भतीजे आनंद गुप्ता ने बताया- पत्नी सरला की कोरोना में मौत हो चुकी थी। पत्नी की मौत के बाद से सत्येंद्र घर में अकेले रहते थे। इनकी दो बेटियां रूबी और प्रीति हैं। रूबी की फिरोजाबाद में शादी हुई है, जबकि प्रीति इस समय दिल्ली में रह रही हैं। प्रीति के पति एयरफोर्स में विंग कमांडर हैं। ऊपर के कमरे में गोली मारी
घर में काम करने वाले नौकर अजीत ने बताया- बुधवार दोपहर करीब 12 बजे मैं सफाई का काम कर रहा था। तभी ऊपर के कमरे से गोली चलने की आवाज आई। मैं कमरे में पहुंचा तो देखा कि गोली मालिक सत्येंद्र की कनपटी में छूते हुए निकली थी। कनपटी से खून बह रहा था। कमरे में बाला हनुमान जी की फोटो पड़ी थी, जबकि उनके हाथ में रिवाल्वर फंसी थी। नौकर ने घटना की जानकारी पुलिस और उनकी बेटी को दी। इसके बाद नवाबगंज पुलिस मौके पर पहुंची। सत्येंद्र को सर्वोदय नगर स्थित रीजेंसी अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां ICU में उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति गंभीर बताई है। नवाबगंज थाना प्रभारी केशव कुमार तिवारी ने बताया- वृद्ध ने मानसिक तनाव के कारण खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने का प्रयास किया है। उनका रीजेंसी अस्पताल में इलाज चल रहा है। टिनिटस से होने लगता है डिप्रेशन
ईयर फाउंडेशन के डायरेक्टर ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. देवेंद्र लालचंदानी ने बताया- टिनिटस से रोगी को कान के अंदर ध्वनि सुनाई देने लगती है। इससे नस में खून का प्रवाह बाधित होने, ट्यूमर, फंगल इन्फेक्शन आदि कारणों से हो सकता है। 20 फीसदी रोगियों को साइकोलॉजिकल कारणों से ध्वनि सुनाई पड़ती है। लगातार आवाज सुनाई पड़ने से डिप्रेशन भी हो जाता है। इससे रोगी घातक कदम उठा लेता है। जब भी डिप्रेशन की स्थिति हो तुरंत ईएनटी के डॉक्टर या फिर मनोरोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। ————– ये खबर भी पढ़िए- ‘मैंने जेवर नहीं चुराए, तभी जहर खा रही हूं’: महिला बोली- कोई रास्ता नहीं बचा, कानपुर पुलिस ने हमको उल्टा फंसाया कानपुर में जेवर चोरी का आरोप लगने पर एक महिला ने जहर खा लिया। इससे पहले उसने सुसाइड नोट लिखा। इसमें कहा- मैं चोर नहीं हूं। मुझ पर और मेरे पति पर झूठा आरोप लगाया जा रहा। मेरी सुनने वाला कोई नहीं। ऐसा क्या करूं, जिससे हम दोनों बेगुनाह साबित हो सकें। पढ़ें पूरी खबर…