‘कलयुगी सुदामा’ संस्कृत नाटक का सफल मंचन:गोमती नगर के अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में हुआ आयोजन

गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में संस्कृत नाट्य कृति ‘कलयुगी सुदामा’ का सफल मंचन हुआ। यह प्रस्तुति उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् और रंगयात्रा लखनऊ के सहयोग से आयोजित रंगमंच प्रशिक्षण कार्यशाला के अंतर्गत हुई। नाटक का लेखन चित्रा मोहन ने किया, जिसका संस्कृत अनुवाद कामिनी श्रीवास्तव ने किया है। निर्देशन ज्ञानेश्वर मिश्र ज्ञानी ने किया। नाटक कृष्ण और सुदामा की प्रसिद्ध मित्रता की कथा को कलयुग के परिवेश में प्रस्तुत करता है। कहानी में सुदामा अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने जाते हैं और उन्हें चावल भेंट करते हैं। श्रीकृष्ण प्रेम से उनका सत्कार करते हैं और उन्हें विदा कर देते हैं। सुदामा को लगता है कि उन्हें कुछ नहीं मिला, लेकिन घर पहुंचने पर उनकी कुटिया महल में बदल चुकी होती है। पत्नी बताती है कि यह सब श्रीकृष्ण की कृपा से हुआ है। संदेह और भ्रम के बाद जब श्रीकृष्ण और राधा प्रकट होते हैं तो सुदामा को अपनी गलती का अहसास होता है और वह क्षमा मांगते हैं। नरोत्तम दास के छंदों का सुंदर प्रयोग किया नाटक के माध्यम से आज के समाज को यह संदेश दिया गया कि सच्ची मित्रता विश्वास और प्रेम पर टिकी होती है। प्रस्तुति में आरती, लोकगीत और कवि नरोत्तम दास के छंदों का सुंदर प्रयोग किया गया, जिससे नाटक और प्रभावशाली बन गया। अंत में रास नृत्य के साथ प्रस्तुति का समापन हुआ। मंच पर गुरुदत्त पांडेय, उज्जवल सिंह, मुकुल चौहान, संकल्प शुक्ल, प्रेम कुमार, अंशिका सक्सेना, लता बाजपेई, सुरुचि सक्सेना और निरुपमा राहुल ने सशक्त अभिनय किया। प्रकाश व्यवस्था तमाल बोस, संगीत आदित्य शर्मा ‘लिप्टन’, मुखसज्जा राज किशोर गुप्ता और नृत्य संयोजन प्रियंका भारती का रहा। मंच निर्माण उमंग फाउंडेशन ने किया, जबकि आयोजन में ज्योति सिंह परिहार, संदीप देव, हरिओम मिश्रा और संहिता मिश्रा का विशेष सहयोग रहा।