आजमगढ़ की कोर्ट ने पुलिस कस्टडी में गोली मारकर हत्या करने वाले इंस्पेक्टर को उम्रकैद की सजा सुनाई है। एक लाख पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। 23 साल पहले बैटरी चोरी में इंस्पेक्टर ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था। पूछताछ के दौरान थाने में बेटे के सामने ही उसे गोली मार दी थी। अगले दिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय की कोर्ट में बुधवार सुबह 7 गवाह पेश किए गए। जिनकी गवाही के आधार पर ये फैसला सुनाया गया। पुलिस जब इंस्पेक्टर जैनेंद्र कुमार सिंह को ले जाने लगी, तो वह मुंह छुपाते नजर आए। इंस्पेक्टर ने रिटायरमेंट से 2 साल पहले 2024 में वीआरएस ले लिया था। अब पढ़िए पूरा मामला… मामला 29 मार्च 2003 का है। आजमगढ़ में रानी की सराय थाने की पुलिस ने बैटरी चोरी के मामले में हरिलाल यादव को हिरासत में लिया था। दौलतपुर के रहने वाले हरिलाल यादव, जितेंद्र यादव के पिता थे। बेटे जितेंद्र को जानकारी हुई, तो वह अपने रिश्तेदार रामवचन यादव के साथ थाने पहुंचा। पुलिस ने जितेंद्र और रामवचन को हवालात में बंद कर दिया था। उनके साथ ही थानाध्यक्ष जैनेंद्र कुमार सिंह के कहने पर दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह ने हरिलाल यादव को पहले गंदी-गंदी गालियां दी। इसके बाद हरिलाल यादव को लाठियों से बुरी तरह पीटा। घंटों प्रताड़ित करने के बाद दरोगा नरेंद्र ने हरिलाल को गोली मार दी। गंभीर हालत में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां हरिलाल की मौत हो गई। बेटे ने दर्ज कराया था केस
अगले दिन, 30 मार्च 2003 की सुबह पुलिस ने जितेंद्र और रामवचन को छोड़ दिया। छूटते ही जितेंद्र और रामवचन जिला अस्पताल पहुंचे। जहां उन्हें पता चला कि पिता हरिलाल की मौत हो गई। इसके बाद जितेंद्र ने कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। इस मामले के पहले भी इसी घटना में रानी की सराय थाने में दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा चुका था। जिसके बाद दोनों मामलों को एक साथ जोड़ दिया गया। सितंबर 2003 में सरकार ने इस मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी। सीबीसीआईडी ने फरवरी 2005 में अदालत में चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे के दौरान आरोपी दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह की मौत हो गई। पीड़ित बेटे जितेंद्र की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी तथा सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार मिश्रा ने कुल सात गवाहों को कोर्ट में पेश किया। बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। थानाध्यक्ष जैनेंद्र कुमार सिंह ने 2 साल पहले वीआरएस ले लिया था। जैनेंद्र कुमार सिंह आजमगढ़ के सिधारी थाने, रानी की सराय थाने सहित आधा दर्जन थानों पर तैनात रहा है। जैनेंद्र वाराणसी के चौबेपुर का रहने वाला है। जैनेंद्र कुमार सिंह की गिनती रंगबाज दरोगाओं में की जाती थी। ये राह चलते लोगों को डंडे से मारने, बाल कटवाने, गालियों से जलील करने जैसी हरकतें आमतौर पर करता था। …………………. ये भी पढ़ें- गाजियाबाद-मोबाइल गेम की लत, 3 बहनें 9वीं मंजिल से कूदीं:उम्र 12-14-16 साल; सुसाइड नोट में लिखा- सॉरी मम्मी-पापा, गेम नहीं छोड़ पाएंगे गाजियाबाद में तीन सगी बहनों ने नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार रात 2 बजे तीनों ने कमरे को अंदर से बंद किया, फिर स्टूल रखकर एक-एक करके बालकनी से छलांग लगा दी। उनकी उम्र करीब 12, 14 और 16 साल है। पिता के मुताबिक, तीनों बेटियों को टास्क-बेस्ड कोरियन लव गेम की लत थी। वे हर वक्त एक साथ रहती थीं। पढ़िए पूरी खबर…