यूपी में 17 दिन में 3 डॉल्फिन की मौत हो गई है। अब रायबरेली में डॉल्फिन मृत मिली है। यह डॉल्फिन गंगा नदी से दूर शारदा नहर में मिली है। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने डॉल्फिन की डेडबॉडी को जांच के लिए कानपुर जू भेजा। इससे पहले 2 जनवरी को कानपुर के जाजमऊ में और 23 दिसंबर को गाजीपुर में डॉल्फिन मृत मिल चुकी हैं। रायबरेली में मृत डॉल्फिन की डेडबॉडी पोस्टमार्टम के लिए कानपुर चिड़ियाघर भेजी गई। पोस्टमार्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, डॉल्फिन के लिवर, किडनी और फेफड़े जैसे सभी महत्वपूर्ण अंग स्वस्थ थे। शरीर पर किसी बाहरी चोट के निशान भी नहीं पाए गए। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि डॉल्फिन की मौत हार्ट फेलियर की वजह से हुई है। हालांकि, मौत की सटीक वजह और किसी आंतरिक संक्रमण की पुष्टि के लिए डॉल्फिन के विसरा को सुरक्षित रख लिया गया है। इसे भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली भेजा गया है। नर डॉल्फिन की उम्र 8 साल और 70 किलोग्राम वजन था। कानपुर के जाजमऊ में 2 जनवरी को मिली थी डॉल्फिन कानपुर में 2 जनवरी की रात जाजमऊ क्षेत्र में गंगा नदी में डाल्फिन का शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाल्फिन की उम्र लगभग 20 साल आंकी गई है। जबकि इसकी औसत आयु 26-30 साल के बीच होती है। ऐसे में यह साफ है कि डाल्फिन की मौत अपनी औसत आयु से पहले हो गई है। डाक्टरों ने मौत का कारण मल्टी आर्गन फेल्योर बताया जा रहा है। जो कि इसके बीमार होने का सूचक है। इसके अलावा पोस्टमार्टम में सामने आया है कि डाल्फिन का लीवर खराब हो चुका था। वह काला निकला है। 10 फीट लंबी डाल्फिन की जिस स्थान पर मौत हुई है, उस स्थान पर गंगा जल बीते लंबे समय से D श्रेणी में है। गाजीपुर में दम घुटने से हुई थी डॉल्फिन की मौत
गाजीपुर में 23 दिसंबर 2025 को पांच फीट लंबी और लगभग 150 किलो वजनी डॉल्फिन (नर) का शव कालूपुर घाट के किनारे मिला था। डिप्टी सीवीओ सर्वेश कुमार की निगरानी में तीन सदस्यीय डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमॉर्टम किया था। 26 दिसंबर को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई, जिसमें मौत का कारण दम घुटना बताया गया। हालांकि, दम घुटने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया था। इसकी जांच के लिए एक टीम लगाई गई है। टीम 30 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
डॉल्फिन एक्सपर्ट और वेस इंडिया के डायरेक्टर डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया- डॉल्फिन के सुरक्षित जीवन के लिए गंगा के पानी में घुलित ऑक्सीजन (DO) कम से कम 5 mg/L होनी जरूरी है। अगर DO का स्तर 3 से 4 mg/L के बीच आ जाता है, तो डॉल्फिन लगातार तनाव में रहती है और उसका प्रजनन प्रभावित होने लगता है। जब यह स्तर 3 mg/L से नीचे चला जाता है, तो लंबे समय तक डॉल्फिन का जीवित रहना संभव नहीं होता। पारा, सीसा और कैडमियम जैसी भारी धातुएं बहुत कम मात्रा में भी डॉल्फिन के लिए घातक होती हैं। इससे प्रजनन क्षमता घट जाती है और शिशु डॉल्फिन की मौत का खतरा बढ़ जाता है जाजमऊ में गंगा की जल गुणवत्ता D कैटेगरी में
जाजमऊ में गंगा की जल गुणवत्ता चिंताजनक बनी हुई है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, यहां घुलित ऑक्सीजन (DO) 8.10 मिग्रा प्रति लीटर है, जबकि BOD 3.50 मिग्रा प्रति लीटर रही। इसके साथ ही टोटल कोलीफार्म की मात्रा 4700 एमपीएन प्रति 100 एमएल और फीकल कोलीफार्म 3300 एमपीएन प्रति 100 एमएल पाई गई। जिसके आधार पर गंगा के इस हिस्से को कैटेगरी ‘D’ में रखा गया है। डॉल्फिन के बारे में क्या यह आप जानते हैं?
इससे पहले चार साल में चार डॉल्फिन की मौत
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WWI) ने भारत की नदियों में डॉल्फिन की संख्या जानने के लिए साल–2024 में सर्वे किया। 3 मार्च 2025 को केंद्र सरकार ने इसके आंकड़े जारी किए। गंगा नदी में डॉल्फिन की संख्या 6324 पाई गई। जबकि बिजनौर से नरौरा बैराज तक इनकी संख्या 52 दर्ज की गई। 2023 में ये संख्या 50 थी। यानि बीते एक साल में दो डाल्फिन बढ़ी हैं। साल–2020 से 2024 तक मेरठ और बुलंदशहर जिले में चार डॉल्फिन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इनकी मौत का कारण आज तक स्पष्ट नहीं हुआ है। डाल्फिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट
3 डॉक्टर ने चिड़ियाघर में डॉल्फिन का पोस्टमॉर्टम किया।
डॉक्टर के मुताबिक, डॉल्फिन व्यस्क थी। मौत का कारण नेचुरल माना जा रहा है।
हांलाकि डॉक्टर ने अंदेशा जाहिर किया है कि पानी जहरीला होने की वजह से भी उसकी मौत हो सकती है। जाजमऊ स्थित गंगा में पानी के सैंपल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से लेने के लिए बोला गया है।
वहीं, पोस्टमॉर्टम डॉल्फिन के ऑर्गन का सैंपल लेकर IVRI भेजा गया है। मौत के सटीक कारण के लिए रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। गंगा में मिली मृत डॉल्फिन फीमेल थी और उसकी उम्र 20 वर्ष है। डॉल्फिन की औसतन उम्र 30 साल होती है। ऐसे में कहा जा सकता है, कि डॉल्फिन ने अपनी औसत आयु से पहले ही दम तोड़ दिया। खतरनाक केमिकल से डॉल्फिन पर संकट
गंगा में जीवों पर संकट की कई वजह दिखाई देती हैं। भारतीय वन्य जीव संस्थान के एक हालिया सर्वे में पता चला है कि गंगेय डॉल्फिन जिन छोटी मछलियों का शिकार करती हैं, वो मछलियां खतरनाक केमिकल के संपर्क में हैं। इस तरह ये केमिकल डॉल्फिन के पेट में पहुंच रहा है। बीते चार साल में मेरठ और बुलंदशहर में चार डॉल्फिन की संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है। आज तक इनकी मौत की सही वजह पता नहीं चल सकी। इसके अलावा बिजनौर से लेकर मेरठ, बुलंदशहर और आगे तक गंगा के खादर इलाके में जो फसल उगती है, उसमें केमिकल का प्रयोग होता है। ये केमिकल पानी के सहारे बहकर गंगा में पहुंच जाते हैं। इससे भी जलीय जीवों को खतरा रहता है। ————————
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