कानपुर के फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले आरोपियों के संपर्क में रहे एजेंटों की तलाश में SIT को बड़ी सफलता हाथ लगी है। SIT को गिरोह के जुड़े 4 एजेंटों का पता लग गया है, जो हापुड़, शिकोहाबाद और लिंग्या यूनिवर्सिटी से डिग्री, मार्कशीट दिलाने का जिम्मा लेते थे। SIT के रडार में आने के बाद एजेंटों के इंदौर और मणिपुर में भागने की जानकारी मिली है, जिसके बाद टीमें उनकी तलाश में ताबड़तोड़ दबिश दे रही हैं। उनको जल्द ही हिरासत में लेकर पूछताछ की जा सकती है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आए दो एजेंटों का जिम्मा एमएससी, बीएससी, बीटेक व बीफार्मा, डीफार्मा की डिग्री उपलब्ध कराना था। जबकि दो अन्य सदस्यों का जिम्मा एलएलबी की डिग्री हासिल कराने का था। इसके साथ ही पुलिस को कुछ अभिभावकों की डिटेल भी मिली है, जिनसे अब संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। अब जानिए पूरा प्रकरण किदवई नगर पुलिस ने रुपए लेकर डिग्री व मार्कशीट बनाने के आरोप में शैलेंद्र कुमार ओझा, नागेश मणि त्रिपाठी, जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह जेल भेजा है। आरोपियों से जुड़े छतरपुर के मयंक भारद्वाज, हैदराबाद के मनीष उर्फ रवि, गाजियाबाद के विनीत, भोपाल के शेखू व शुभम दुबे की तलाश की जा रही है। नौबस्ता के ललित मोहन अवस्थी की गिरफ्तारी से SIT को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। उनसे पूछताछ के बाद चार और एजेंटों का पता चला है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इन चार एजेंटों के जरिए जेल गए शैलेंद्र कुमार ओझा व उसके साथी मार्कशीट व डिग्री बनाने का खेल कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शुरुआत में आरोपी छात्र-छात्राओं का विश्वविद्यालयों से एनरॉल्मेंट कराकर पूरी प्रक्रिया कराया करते थे। कुछ छात्रों ने फीस जमा करने के बाद दाखिला भी लिया था। बस उनको कक्षाओं में उपस्थित होने की अनिवार्यता नहीं थी। केवल परीक्षा के समय हाजिर हो जाते थे। SIT सूत्रों के मुताबिक 14 विश्वविद्यालयों में से 6 के मार्केटिंग और सेल्स टीम के स्टाफ की जानकारी मिली है। यह स्टाफ कर्मी रुपये लेकर डिग्री व मार्कशीट बनाने वाले आरोपियों के संपर्क में लंबे समय से थे। पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है। इस संबंध में विश्वविद्यालयों को पत्र भी भेजा गया है। उनसे स्टाफ कर्मियों के बारे में जानकारी मांगी गई है। ————- ये खबर भी पढ़िए- फर्जी डिग्री से कमाई का 60% कमीशन यूनिवर्सिटी ले रहीं: कानपुर का ठग 4 देशों के राष्ट्रपति से मिला, 9 राज्यों तक कैसे फैला सिंडिकेट कानपुर में बिना परीक्षा दिए मार्कशीट और डिग्रियां दिलाने वाला सिंडिकेट पकड़ा गया। मास्टर माइंड मैथ टीचर शैलेंद्र से पुलिस ने बंद कमरे में पूछताछ की। जो कुछ सामने आया, वो बेहद चौंकाने वाला था। बीटेक, बी. फार्मा, एलएलबी की डिग्रियां दिलाने वाला सिंडिकेट सिर्फ 40% कमीशन पर काम करता था। फर्जी डिग्रियों से कमाई का 60% विश्वविद्यालयों के क्लर्क और कर्मचारियों के पास जाता था। इस सिंडिकेट के सरगना शैलेंद्र ने एडमिशन एजेंट की तरह काम शुरू किया था, मगर धीरे-धीरे कई विश्वविद्यालयों के क्लर्क और कर्मचारी उसके संपर्क में आ गए। पढ़ें पूरी खबर…