काशी में बटुक बोले- अपने गुरु शंकराचार्य पर पूरा भरोसा:फंसाने की साजिश हुई; हाईकोर्ट से राहत के बाद श्री विद्या मठ में जश्न

‘अपने गुरु पर पूरा भरोसा है। हमारे शंकराचार्य को फंसाने की बड़ी साजिश रची जा रही है। सभी को कोर्ट पर पूरा भरोसा है। सत्य की जीत तय है।’ ये बातें काशी में शंकराचार्य के श्री विद्या मठ में शिक्षा ले रहे बटुकों ने कही। सभी इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर खुश हैं। मठ में करीब 400 बटुक, धर्म और आध्यात्म की शिक्षा ले रहे हैं। इससे पहले, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर 2 बटुकों से यौन शोषण के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद शुक्रवार को हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। कोर्ट मामले में मार्च के तीसरे सप्ताह में सुनवाई करेगा। इस बीच, दैनिक भास्कर ने अध्ययन कर रहे बटुकों से बात की है। विस्तार से पढ़िए- ‘2012 से मठ में हूं, कभी कुछ गलत नहीं हुआ’
मठ में शिक्षा ग्रहण कर रहे बटुक आर्यन पांडेय ने कहा, “वह वर्ष 2012 से इसी श्री विद्या मठ में शंकराचार्य जी के सानिध्य में रहते हैं। इतने दिनों में हमारे साथ यहां कभी कुछ भी गलत नहीं हुआ है। गुरुजी पर लगाए गए सारे आरोप फर्जी हैं, इसकी पुष्टि भी कोर्ट से हुई है। सिर्फ अफवाह फैलाई गई। यहां पर कोई दिक्कत नहीं है। सत्य की जीत हुई है। ‘जो आरोप लगाए गए, वह सोचना भी पाप’
बटुक आदर्श पाठक ने कहा, “तीन साल से हम यहां रहते हैं। जो आरोप लगाए गए हैं, वह तो सोचना भी पाप हैं। इतने बड़े संत को मनगढ़त तरीके से बदनाम करने का काम कर कर रहे हैं। यह कौन-सा धर्म है। आज हम सभी लोग बहुत खुश हैं जो कोर्ट से राहत मिली है।” ‘सच की जीत होगी और झूठ हारेगा’
प्रीतम पांडेय कहते हैं- “आज हमारे गुरुजी पर जो आरोप लगाए गए हैं वह पूरा देश मानने को तैयार नहीं है, क्याेंकि धर्म को मानने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पता है कि शंकराचार्य जी कैसे हैं? हम सबको पूरा विश्वास है सच की जीत होगी और झूठ हारेगा।” ‘चार साल से यहां हूं, बहुत अच्छा वातावरण है’
बटुक कुश तिवारी ने बताया कि वह पिछले चार साल से मठ में रहकर अध्ययन कर रहे। कहा- यहां पर हम सैकड़ों बटुक रहकर गुरुजी के सानिध्य में सनातन को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। यहां का वातावरण बहुत अच्छा है। महाराज जी खुद आकर हम लोगों से पूछते हैं कि कोई परेशानी तो नहीं है? आरोप लगाकर उन्हें फंसाने का काम किया जा रहा है, ताकि वह गाय माता के लिए जो मुहिम चला रहे हैं, वह कहीं न कहीं प्रभावित हो। संन्यासी का संन्यासी के साथ गलत बर्ताव नहीं होना चाहिए
सार्थक चौबे बिहार के रहने वाले हैं। वह एक साल से यहां रहते हैं। वह कहते हैं- “संगम के माघ मेले में शिखा खींचकर संन्यासियों को पीटा गया। एक संन्यासी होकर दूसरे संन्यासी के साथ इस तरह का बर्ताव योगी जी कर रहे हैं यह बहुत ही गलत है, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।” अब जानिए पूरा मामला… प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था। इसके 8 दिन बाद 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई। FIR में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 2-3 अज्ञात आरोपी बनाए गए। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की। 26 फरवरी को शंकराचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आ गई। पुलिस सूत्रों का दावा है कि बच्चों के साथ कुकर्म की पुष्टि हुई है। इधर, एक पीड़ित बटुक पहली बार मीडिया के सामने आया। ‘आज तक’ को दिए इंटरव्यू में दावा किया- मैं अध्ययन के लिए गया था, तभी मेरा शोषण किया गया।
झूठी कहानी अदालत में ध्वस्त हो गई इससे पहले हाईकोर्ट से राहत के बाद शंकराचार्य ने शुक्रवार को बताया था- वकील पीएन मिश्रा से बात हुई है। उन्होंने बताया कि न्यायालय में हम लोगों ने आपका पक्ष रखा। विस्तार से न्यायालय में चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने अपनी अपनी दलील रखी। न्यायालय ने ये कहा, हम फैसला रिजर्व कर रहे हैं। साथ ही जो गिरफ्तारी की कार्रवाई को रोक दिया है। शंकराचार्य ने कहा था- वहां पर जो दलील रखी, वह इस बात पर थी कि मुकदमा झूठा बनाया गया है। जज को हमारी रखी बात में बल दिखाई दिया। तभी तो उन्होंने एक निर्देश दिया है। इसलिए हम शुरुआत से कह रहे थे। हम लोगों ने अपनी बात जो सही थी, वह रखी। और आप देखिए न्यायाधीश ने जो एक आदेश पारित किया है। उससे ये पता चलता है कि इस मामले को बना करके रखा गया है। जितना बड़ा प्रचार किया जा रहा है कि आश्रम में बटुकों का शोषण, गुरुकुल में बटुकों का शोषण इनके यहां होता है। ये जो बात चलाई जा रही थी। उसको तो जो AG है, उन्होंने ने ही समाप्त कर दिया। उन्होंने ही कह दिया कि आश्रमें ये बटुक रहे ही नहीं। हम लोग पहले से ही कह रहे थे। आज वह बात जनता के सामने प्रमाणित कर दी। जो कहानी बनाई गई थी, वह पूरी तरीके से ध्वस्त हो गई। हिंदू समुदाय बहुत आहत था कि ये क्या हो रहा है। लोगों में तरह- तरह की आशंकाएं थीं। उन लोगों को लगने लगा था कि हमारे गुरु जी ने कुछ गड़बड़ी की है। आज कम से कम प्रथम दृष्टया ही सही, लेकिन सबको पता तो चला। कहीं न कहीं सुनवाई होती है, कहीं न कहीं न्याय होता है। ————-
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शीशमहल, राजमहल से भी बड़ा है। देश के अंबानी के घर से भी बड़ी सुविधाएं उनके उस कमरे में हैं। एक स्विमिंग पूल बनाया गया है, जिसमें शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद नहाते हैं। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के इन आरोपों ने देश में भूचाल ला दिया। शंकराचार्य पर यौन शोषण और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हो गया। इसे बाद से सनातन धर्म से जुड़े करोड़ों लोगों की नजरें वाराणसी के श्रीविद्या मठ की इमारत पर टिक गईं, जिसे शीशमहल बताया गया है। क्या यहां संगमरमर की फर्श है? कालीन बिछे रहते हैं? अंदर स्विमिंग पूल है? क्या कोई ऐसा फ्लोर है, जहां एंट्री मना है? पूरी खबर पढ़ें