कुशीनगर में कड़ाके की ठंड के बीच कप्तानगंज नगर पंचायत में रैन बसेरे और अलाव की व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। जांच के दौरान नगर के प्रमुख चौक-चौराहों पर अलाव की आंशिक व्यवस्था तो दिखाई दी। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कप्तानगंज में अलाव केवल औपचारिकता बनकर रह गया। अस्पताल के मुख्य द्वार पर एनआईसीयू के सामने केवल सूखी लकड़ियां और राख पड़ी मिली।लेकिन आग नहीं जलाई गई थी। वहीं इमरजेंसी वार्ड की ओर भी अलाव की कोई व्यवस्था नहीं थी। जिले के सबसे व्यस्त कप्तानगंज रेलवे जंक्शन पर स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। यहां न तो अलाव की व्यवस्था की गई थी और न ही यात्रियों के ठहरने के लिए कोई रैन बसेरा बनाया गया था। ठंड से बचने के लिए कुछ यात्री कूड़ा और आसपास से जुटाई गई लकड़ियां जलाते नजर आए। रैन बसेरा न होने के कारण कई यात्री टिकट घर के अंदर दुबककर बैठने को मजबूर दिखे। वर्तमान में रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके चलते वेटिंग रूम बंद है। इस स्थिति में न तो जिला प्रशासन, न रेलवे प्रशासन और न ही नगर पंचायत द्वारा यात्रियों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। बिहार, गोरखपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से आने-जाने वाले यात्रियों को कड़ाके की ठंड में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्री अर्जुन ने बताया कि बाहर से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए ठंड से बचाव का कोई इंतजाम नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और संबंधित विभाग जल्द ही स्टेशन जैसे व्यस्त स्थानों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। उनका कहना था कि बच्चों और परिवार के साथ यात्रा करने वालों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। नगर क्षेत्र में रैन बसेरे की पड़ताल करने पर यह सामने आया कि स्टेशन से करीब दो किलोमीटर दूर श्मशान घाट की ओर एक अस्थायी रैन बसेरा बनाया गया है। वहां चारपाई और टेंट में बिस्तरों की व्यवस्था है, लेकिन इसकी जानकारी आम लोगों और यात्रियों तक नहीं पहुंच सकी है। दूरी अधिक होने के कारण भी जरूरतमंद लोग वहां तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।