कैंसर से जीते, बेटे से हारे 555 बीड़ी के मालिक:मथुरा में सीने में गोली मारी; कभी चक्की चलाते थे, बीड़ी ने पलटी किस्मत

मथुरा में बीड़ी मालिक पिता-पुत्र का शनिवार देर शाम मोक्षधाम पर अंतिम संस्कार किया गया। कारोबारी सुरेश चंद्र अग्रवाल को उनके बड़े बेटे दिनेश और बेटे नरेश को उनके पुत्र शौर्य ने मुखाग्नि दी। बीड़ी के कारोबार से नाम कमाने वाले कारोबारी सुरेश चंद्र अग्रवाल को 2 साल पहले कैंसर की शिकायत हुई। शुरुआती स्टेज में जानकारी होने पर उन्होंने इसका ट्रीटमेंट शुरू कराया। महज 6 महीने में कैंसर को हराकर जिंदगी की जंग जीत ली। लेकिन कैंसर से जीतने वाले सुरेश चंद्र अग्रवाल अपने बेटे से हार गए। सुरेश अग्रवाल की मेहनत और संघर्ष की मिसाल दी जाती थी। कैंसर से जंग जीतने के बाद उन्होंने अपने कारोबार को फिर से आगे बढ़ाया, लेकिन बेटे के हाथों लिखी मौत से वह हार गए। अब पढ़िए सुरेश चंद्र अग्रवाल के संघर्ष की कहानी… शालीग्राम मंदिर में चलाते थे आटा चक्की
सुरेश चंद्र अग्रवाल के करीबी भीमसेन अग्रवाल ने बताया- सुरेश अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर बड़े आदमी बने हैं। कभी वह सवा मन शालीग्राम मंदिर के नीचे एक छोटी सी आटा चक्की चलाते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात पश्चिम बंगाल के रहने वाले एक व्यक्ति से हुई, जिसने उन्हें बीड़ी का कारोबार शुरू करने की सलाह दी। यही सलाह सुरेश के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। शिवपुरी के जंगलों में बीड़ी के पत्ते जुटाए
सुरेश चंद्र अग्रवाल ने अपनी पत्नी आशा अग्रवाल के साथ मिलकर 1970 में वृंदावन में बीड़ी के कारोबार की नींव रखी। शुरुआत में सुरेश खुद शिवपुरी के जंगलों में जाकर बीड़ी के पत्ते जुटाते थे। एक कमरे में परिवार के साथ बैठकर बीड़ी बनाते। इसके बाद उसे बाजार में बेचते थे। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और ‘दिनेश बीड़ी’ नाम से उन्होंने अपनी पहचान बना ली। इस फर्म में सुरेश चंद्र अग्रवाल ने अपने तीनों बेटों (दिनेश, नरेश और महेश) को बराबर हिस्सेदारी दी, जिससे भविष्य में कभी कोई विवाद न हो। इसी फर्म के नाम से उन्होंने जमीन भी खरीदी थी। धीरे-धीरे उनका कारोबार वृंदावन से निकलकर पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया। यहां पर उन्होंने एक कारखाना लगाया, जिससे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला। एक बेटा कोलकाता तो 2 बेटे वृंदावन से कारोबार संभालते थे
वृंदावन के गौरा नगर कॉलोनी के रहने वाले सुरेश चंद्र अग्रवाल (75) बीड़ी के बड़े कारोबारी थे। परिवार में पत्नी आशा (70) और तीन बेटे- दिनेश, नरेश और महेश थे। तीनों बेटों की शादी हो चुकी है। दिनेश अपनी पत्नी रश्मि और बच्चों के साथ कोलकाता की बीड़ी फैक्ट्री संभालते हैं। दरअसल, सुरेश चंद्र ने अपने बड़े बेटे निदेश के नाम पर ही कारोबार शुरू किया था। धीरे-धीरे कई राज्यों में कारोबार फैल गया। 555 बीड़ी ब्रांड उनका सबसे फेमस ब्रांड है। उनका मंझला बेटा नरेश (50) और सबसे छोटे महेश वृंदावन में ही रहकर कारोबार संभालते थे। नरेश और पत्नी अंशु को एक बेटा और बेटी हैं। बेटी श्रेया मुरादाबाद में मेडिकल की पढ़ाई करती है, तो बेटा शौर्य बेंगलुरु में बीटेक कर रहा। जबकि महेश अग्रवाल की बेटी रिया और बेटा कृष्णा बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे थे। पत्नी आशु साथ रहती है। पिता की हत्या के बाद घबराकर खुद को मारी गोली
घरवालों के अनुसार, शुक्रवार रात 9 बजे घर पर नरेश शराब पी रहा था। पिता सुरेश चंद्र अग्रवाल को बेटे की शराब पीने की आदत पसंद नहीं थी। रात में भी उन्होंने बेटे को शराब पीने पर टोका। यह बात नरेश को नागवार लगी, फिर वह पिता से झगड़ने लगा। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में नरेश ने 32 बोर की लाइसेंसी पिस्टल से पिता को गोली मार दी। बुलेट उनके सीने में लगी। सुरेश चंद्र जमीन पर गिर पड़े। यह देखकर नरेश घबरा गया और आत्मग्लानि में उसने खुद को भी गोली मार ली। वह भी जमीन पर गिर पड़ा। गोली की आवाज सुनकर परिवार के लोग दौड़े पहुंचे। देखा तो बाप-बेटे जमीन पर अचेत पड़े थे। परिजन दोनों को वृंदावन के राम कृष्ण मिशन अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर्स ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। वारदात की सूचना पर पुलिस पहुंची। उस कमरे की जांच की, जहां दोनों खून से लथपथ मिले थे। फोरेंसिक टीम ने भी साक्ष्य जुटाए। कई राज्यों में करोड़ों की प्रॉपर्टी
व्यापारी नेता भीमसेन अग्रवाल बताते हैं- सुरेश चंद्र अग्रवाल ने बेटों के साथ मिलकर बीड़ी कारोबार को कई राज्यों में फैलाया। बड़े कारोबारी के रूप में अलग पहचान बनाई। उन्होंने मथुरा-वृंदावन ही नहीं, पश्चिम बंगाल में भी प्रॉपर्टी में बड़े निवेश किए थे। वहां उनकी कई बेशकीमती जमीनें हैं, कीमत अरबों में बताई जाती है। व्यापारी नेता धनेंद्र अग्रवाल ने बताया- नरेश ड्रिंक कर रहा था। उसके पापा ने रोका तो झगड़ा हो गया। झगड़े में उसने पिस्टल निकाल ली। पहले गोली पिता को मार दी। फिर खूद भी मार लिया। छोटी-छोटी बात पर तैस में आ जाता था नरेश
पड़ोसियों ने बताया कि कारोबारी बहुत ही मिलनसार थे। वह सभी से सहजता से घुल-मिल जाते थे। उनका बेटा नरेश आक्रामक स्वभाव का था, छोटी-छोटी बात पर तैस में आ जाता था। उसमें शराब पीने की भी लत थी। हालांकि, इन सब के बावजूद नरेश सामाजिक कार्यों में हमेशा सक्रिय रहता था। —————————- ये भी पढ़ें- रविकिशन ने बताया योगी कैसे शक्तिशाली बने:फिर सीएम ने चुटकी ली, पूछा- आप किस कैंब्रिज से पढ़े, देखें VIDEO सीएम योगी अक्सर गोरखपुर सांसद रवि किशन की चुटकी लेने से नहीं चूकते। 1 नवंबर को उन्होंने गोरखपुर में एक बार फिर से रवि किशन की कैंब्रिज में पढ़ाई के नाम पर चुटकी ली। कहने लगे कि रवि किशन मुझसे कह रहे थे कि वे कैंब्रिज में पढ़ते थे। इस पर मैंने पूछा कि क्या आपने कैंब्रिज से डिग्री ली है? फिर उन्होंने कहा- नहीं, 12वीं पास हूं। पढ़िए पूरी खबर…