बलरामपुर के स्थानीय गुरुद्वारे में सिक्ख धर्म के नवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया गया। मंगलवार रात आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में संगत ने गुरु साहिब के अद्वितीय बलिदान को नमन किया। गुरुद्वारा परिसर में शबद-कीर्तन की मधुर धुनें गूंजीं। कीर्तन के उपरांत सामूहिक अरदास की गई, जिसमें देश और समाज की खुशहाली की कामना की गई। कार्यक्रम के दौरान ज्ञानी रविंद्र सिंह ने गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, त्याग और शौर्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मुगल शासक औरंगजेब द्वारा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने पर गुरु साहिब ने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और अपने प्राणों की आहुति दे दी। ज्ञानी रविंद्र सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान मानवाधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और सत्य की रक्षा का अमर प्रतीक है। यही कारण है कि यह शहीदी दिवस आज भी पूरे विश्व में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है।
इस अवसर पर लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी जाति और धर्म के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इससे भाईचारे और समानता का संदेश और प्रगाढ़ हुआ। कार्यक्रम में सहजप्रीत सिंह, गुरदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, मनप्रीत सिंह, कुलजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने गुरु साहिब की शिक्षाओं पर चलने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया।