गोरखपुर चिड़ियाघर में बाघिन मैलानी की मौत:लंबे समय से चल रही थी बीमार, अब तक 8 वन्यजीव तोड़ चुके हैं दम

गोरखपुर चिड़ियाघर की सबसे लोकप्रिय और उम्रदराज बाघिन मैलानी का निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ रहने के बावजूद मैलानी ने आगंतुकों और कर्मचारियों के दिलों में अपनी खास पहचान बनाई थी। उसके जाने से प्राणी उद्यान और पूरे शहर में शोक की लहर फैल गई है। प्राणी उद्यान के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि बर्ड फ्लू संक्रमण और उम्र बढ़ने के कारण मैलानी के पाचन तंत्र, किडनी और लिवर कमजोर हो गए थे। कमजोर प्रतिरोधक तंत्र के चलते उसका इलाज चुनौतीपूर्ण बन गया था। लंबे समय तक अस्वस्थ रहने की वजह से उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती रही। लगातार निगरानी के बावजूद नहीं बच सकीं मैलानी
IVRI बरेली और कुमारगंज अयोध्या के पशु चिकित्सा महाविद्यालय के विशेषज्ञ लगातार मैलानी की देखभाल और परामर्श में जुटे रहे। छह महीने तक चले प्रयासों और निगरानी के बावजूद उनकी सेहत स्थिर नहीं रह सकी। निदेशक डॉ. बी. सी. ब्रह्मा ने बताया कि बेहतर इलाज और आराम देने के लिए मैलानी को मुख्य बाड़े से हॉस्पिटल एरिया में भी शिफ्ट किया गया था। शोक सभा में दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि
मैलानी के निधन के बाद प्राणी उद्यान में शोक सभा आयोजित की गई। निदेशक, उपनिदेशक, क्षेत्रीय वन अधिकारी और सभी कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने मैलानी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। चिड़ियाघर के कर्मचारी उसके जाने से उद्यान में एक खालीपन महसूस कर रहे हैं। चार साल तक मुख्य बाड़े की रही शान
जनवरी 2021 में लखनऊ से गोरखपुर लाई गई मैलानी ने चार साल तक मुख्य बाड़े में रहकर आगंतुकों को अपनी गर्जना और शक्ति से मोहित किया। वह चिड़ियाघर की पहली बाघिन थीं जिनकी गर्जना पूरे परिसर में सुनाई देती थी। बच्चों, युवाओं और पर्यटकों के लिए उसकी उपस्थिति हमेशा यादगार रहेगी।