गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने चेताया है कि पावर सेक्टर में निजी घरानों की मोनोपोली उपभोक्ताओं के हित में नहीं है। समिति ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के एकतरफा फैसले को तुरंत रद्द करने की मांग की। उनका कहना है कि नई निजीकरण प्रक्रिया और रिस्ट्रक्चरिंग से बिजली आपूर्ति प्रभावित होने पर पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। संघर्ष समिति ने कहा कि कर्मचारियों और अभियंताओं के विरोध के बावजूद प्रबंधन ने हजारों पद समाप्त कर नई व्यवस्था लागू कर दी है। समिति इसे निहित स्वार्थों पर आधारित विफल प्रयोग करार देती है और इसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ सकता है। CAG ऑडिट से मुक्त निजी कंपनियों का लाभ नहीं समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि निजी कंपनियों को CAG ऑडिट से मुक्त रखा गया है। इसके कारण वास्तविक लाभ-हानि का लेखा जोखा नहीं मिलता और मुनाफा सीधे निजी कंपनियों के पास जाता है। समिति ने चेताया कि निजी कंपनियां मनमाने खर्च दिखाकर उपभोक्ताओं पर बोझ डाल रही हैं। संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हो रहे निजीकरण में वही गंभीर गलतियां दोहराई जा रही हैं, जो दिल्ली, उड़ीसा और चंडीगढ़ में हुई थीं। निजी कंपनियों को अरबों की संपत्ति कम कीमत पर दी गई और आम उपभोक्ता ठगे रह गए। सुधार का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा समिति ने बताया कि निजी कंपनियों ने सुधार का दावा किया, लेकिन उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कोई कमी नहीं आई। उल्टे हाल ही में चंडीगढ़ में छह महीने के भीतर बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया। निजीकरण में पारदर्शिता की कमी संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि ट्रांजैक्शन कंसलटेंट का चयन पारदर्शी तरीके से नहीं हुआ। इसके परिणामस्वरूप सरकारी परिसंपत्तियों को कम मूल्य पर बेचा गया और सरकार को अरबों रुपए का नुकसान हुआ। आगरा में टोरेंट पावर कंपनी ने 2,200 करोड़ रुपए के उपभोक्ता बकाया आज तक जमा नहीं किए। संघर्ष समिति के अनुसार, आज आंदोलन के 353वें दिन बिजली कर्मचारियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद और मुरादाबाद में प्रदर्शन किया।