गोरखपुर में माह-ए-रमजान के तहत मंगलवार को 13वां रोजा रखा गया। मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज और तरावीह के लिए नमाजियों की संख्या बढ़ने से व्यवस्थाएं तेज कर दी गई हैं। इमाम और मुअज्जिन सहरी में जगाने, इफ्तार का समय बताने, नमाज की पाबंदी सुनिश्चित कराने और साफ-सफाई की निगरानी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वुजू के पानी, बिजली और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अलग-अलग मोहल्लों से आने वाली इफ्तारी को एकत्र कर नमाजियों में बांटा जा रहा है। बड़गो की 11 साल की सिदरा ने रखा पहला रोजा गोरखपुर के बड़गो क्षेत्र में रहने वाले अजमेर अली सिद्दीकी और शाहीना खातून की 11 साल की बेटी सिदरा सिद्दीकी ने अपना पहला रोजा रखा। सिदरा कॉर्मल गर्ल्स इंटर कॉलेज में कक्षा पांच की छात्रा हैं। उन्होंने परिवार के साथ सहरी की और दिनभर इबादत में समय बिताया। शाम को पूरे परिवार के साथ इफ्तार किया गया। इस मौके पर परिजनों और परिचितों ने उन्हें दुआएं और उपहार दिए। एडवोकेट मिनहाज, मेराज, मंजर, मासूम, अकरम, इंजमाम, आसिम, अर्श, शमीम और मोहसिन ने मुबारकबाद दी। रमजान में रोजा, तरावीह और जकात पर दें ध्यान अस्करगंज के एडवोकेट मो. काशिफ एम खान ने कहा कि रमजान में रोजा, तरावीह, कुरआन की तिलावत, एतिकाफ और शबे कद्र की इबादत का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि इस महीने में गुनाहों से बचने और जरूरतमंदों की मदद करने पर जोर दिया गया है। जकात और सदका समय से अदा करने की अपील की गई। इबादत से अनुशासन और आत्मसंयम का संदेश जमुनहिया बाग के वरिष्ठ शिक्षक आसिफ महमूद ने कहा कि रमजान का हर पल इबादत से जुड़ा होता है। रोजा रखना, इफ्तार करना, तरावीह पढ़ना और सहरी करना सभी अनुशासन और आत्मसंयम सिखाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस महीने को आत्मसुधार और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर बनाएं। हेल्पलाइन पर जकात और रोजे से जुड़े सवालों के जवाब
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232 और 7860799059 पर मंगलवार को भी सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा। उलेमा ने स्पष्ट किया कि निसाब के माल पर साल पूरा होने के बाद बिना कारण जकात में देरी करना ठीक नहीं है। रोजे की हालत में टांका लगवाने से रोजा नहीं टूटता। पूरे रमजान तरावीह की नमाज पढ़ने की भी अहमियत बताई गई।