ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय में मंगलवार शाम हवाई हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। शाम छह बजे जैसे ही सायरन बजा, पूरा विश्वविद्यालय परिसर अचानक अफरा-तफरी के माहौल में बदल गया। लोग जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़ते नजर आए। इस दौरान कुछ लोग बेहोश होने और कुछ घायल होने का अभिनय करते हुए मदद के लिए पुकारते दिखाई दिए। यह दृश्य किसी वास्तविक घटना का नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में प्रशासन और नागरिकों की तैयारियों को परखने के लिए आयोजित मॉक ड्रिल का हिस्सा था। काल्पनिक हवाई हमले की चेतावनी के रूप में दो मिनट तक सायरन बजाया गया। इसके बाद पूरे परिसर की बिजली आपूर्ति बंद कर ब्लैकआउट किया गया। निर्देशानुसार नागरिकों ने जमीन पर लेटकर और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेकर बचाव का अभ्यास किया। काल्पनिक हवाई हमले के समाप्त होने के बाद ‘ऑल क्लियर’ संकेत के रूप में दो मिनट तक तेज आवाज में सायरन बजाया गया। इसके पश्चात मॉक ड्रिल के अगले चरण में हमले के कारण आग लगने और क्षति जैसी स्थिति का अभ्यास कराया गया। नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों ने अग्निशामक यंत्रों की मदद से छोटी आग पर काबू पाया, जबकि अग्निशमन विभाग ने फायर टेंडर के जरिए बड़ी आग को सफलतापूर्वक बुझाने का प्रदर्शन किया। इस मॉक ड्रिल में नागरिक सुरक्षा के 50 स्वयंसेवक, पावर कॉर्पोरेशन विभाग, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन और शारदा विश्वविद्यालय के कर्नल सुरेंद्र सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वय की क्षमता को मजबूत करना रहा।